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फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर होगी कार्रवाई

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श्रावस्ती। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। इसकी सेटेलाइट से निगरानी कराई जा रही है। यदि किसान की ओर से पराली जलाई गई तो उनके विरुद्ध मामला दर्ज कर न सिर्फ जुर्माना वसूल किया जाएगा, बल्कि उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।
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यह जानकारी देते हुए उप कृषि निदेशक आरपी राना ने किसानों से अपील की है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शासन की ओर से कई योजनाएं व जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण फैलने के साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती है। यदि समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका दुष्परिणाम झेलना पड़ेगा। फसल अवशेष न जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है। इसके साथ ही भूसा, पुआल बनाने से जानवरों को भी आहार की पूर्ति होती है।
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फसल अवशेष जलाने की घटना का खुलासा होने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश पर अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए 5000 रुपये व पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए 15000 रुपये प्रति घटना जुर्माना वसूल किया जाएगा।
फसल अवशेष जलाना अपराध की श्रेणी में आता है। यदि पुनरावृत्ति होती है तो संबंधित किसान को जेल भी हो सकती है। जिले में अब तक फसल अवशेष जलाने वाले 84 किसानों पर विभिन्न थानों में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें से 58 किसानों को गिरफ्तार किया गया है। यदि कोई किसान पराली जलाते हुए पाया गया, तो उसके विरुद्ध तत्काल केस दर्ज कराकर गिरफ्तार किया जाएगा।
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