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दुष्कर्म के आरोपियों को दी जाए फांसी की सजा

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अपराजिता के तहत भिनगा में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धाजंलि देती शिक्षिकाएं। - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। हैदराबाद व उन्नाव में बेटियों के साथ हुई दरिंदगी की घटनाओं ने महिलाओं को एकजुट होने को मजबूर कर दिया है। ऐसी घटना करने वालों को कोर्ट में जल्द सुनवाई कर फांसी देनी चाहिए, ताकि ऐसा कृत्य करने वाले दरिंदे सहमे और आगे कोई बेटी ऐसी घटना का शिकार होने से बचे। इसके लिए सरकार को कानून और सख्त बनाना होगा। यह बातें शनिवार को अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत भिनगा नगर के टीचर्स कॉलोनी में हुए संवाद के दौरान शिक्षिकाओं ने कहीं।
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संवाद के दौरान शिक्षिकाओं में कहा कि हैदराबाद व उन्नाव में बेटियों के साथ हुई दरिंदगी से समाज के हर वर्ग में रोष है। शिक्षिकाओं ने देश में तेजी से बढ़ रहे महिला अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष कानून बनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध पर नियंत्रण के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आकर पुरुषों की मानसिकता परिवर्तित करने पर बल देना चाहिए। साथ ही इतनी भयावह सजा अपराधियों को दी जाय, जो उनके लिए एक उदाहरण का कार्य करे।
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समाज में हो रही इस तरह की घटना भयावह है। इनको अंजाम देने वाले मानसिक रूप से विकृत हैं। उनको कठोर सजा देने का नियम भी है, लेकिन प्रक्रिया लंबी होने से उन्हें देर में सजा मिल पाती है। ऐसी घटनाओं का विरोध कर पुलिस को सूचना दें। - सुनीता सिंह, सब इंस्पेक्टर
हत्या और दुष्कर्म के अपराधियों को सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा होनी चाहिए। चाहे अपराधी जिस आयु वर्ग का हो। ऐसे दोषियों के खिलाफ फांसी की सजा का कानून बनना चाहिए, जिससे इस तरह का अपराध करने वालों में भय उत्पन्न हो। - संजीवनी सिंह
दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के लिए जल्द से जल्द ऐसा कानून बने, जिसमें छह महीने या छह साल नहीं छह दिन में सजा का प्रावधान किया जाए। ऐसे अपराधियों के लिए बस एक ही सजा हो मौत। जिससे अपराधियों के मन में कानून का भय व्याप्त हो। - हेमलता यादव
हम दुर्गा व लक्ष्मी का पूजन करते हैं, जबकि कन्या रूपी लक्ष्मी को गर्भ में आते ही उसे मिटाने का प्रयास करते हैं। ऐसा कदापि नहीं होना चाहिए। इतिहास गवाह है कि जब जब महिला व पुरुष का लिंगानुपात घटा है, तब तब महिलाओं के साथ अपराध बढ़ा है। - अंजली मौर्या
समाज महिलाओं को पुरुषों के समान बराबरी का अधिकार देने का दावा करता है। जबकि कन्या भ्रूण हत्या, दहेज, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ व महिलाओं पर अत्याचार किया जा रहा है। जब तक यह कुप्रथाएं नहीं मिटती तब तक पूरी तरह महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता। - कुसुमलता सिंह
हम संकल्प लें कि महिलाओं व बच्चियों को अबला नहीं मानेंगे। बल्कि उन्हें समानता का अधिकार देते हुए उन्हें भी खुल कर जीवन जीने देंगे। महिलाओं के प्रति जो लोगों के मन में भ्रम है, उसे मिटाकर बेटा व बेटी को एक समान मानने का संकल्प लेंगे। - संगीता मिश्रा
नारी दीपक है जो हर रूप में प्रकाश देती है। जबकि उसका जीवन अंधेरे में रहता है। समाज में स्त्री पुरुष के मध्य बोए गए इस भेदभाव के बीज को मिटाने के लिए ज्ञान रूपी प्रकाश जगाना होगा। हमें इन परंपराओं को तोड़ कर मजबूत राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आना होगा। - माधुरी कंसल
जब तक ऐसे जघन्य अपराध करने वालों, दहेज मांगने वाले व कन्या भ्रूण हत्या के पक्षधर का सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा, तब तक ऐसे लोग अपराध करते रहेंगे। महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। फिर उनके साथ दोहरा व्यवहार उन्हें पीछे ढकेला जाता है। - दीपा यादव
महिलाओं, युवतियों व बच्चियों में भी कहीं न कहीं यह बात घर किए रहती है कि वह स्त्री है। हमें अपनी सोच बदलनी होगी। दहेज जैसी कुप्रथा का हमें विरोध करना होगा। लोगों को बताना होगा कि हम भी किसी से कम नहीं हैं। हमें कुप्रथाओं को मिटाने का संकल्प लेना होगा। - श्रुति श्रीवास्तव
महिलाओं को भले ही पुरुष के समान माना गया, लेकिन हमें बौद्धिक आजादी अब तक नहीं मिली। नारियां आज जागरूक हो रही हैं। वह अपने कर्तव्य व अधिकार को समझती हैं। जागरूक होने के नाते हमें अपने व दूसरों के साथ हो रहे अपराधों पर खुलकर लड़ाई लड़नी होगी। - चंद्रावती देवी
जिस देश में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा होती है। वहीं नारियों का अपमान भी किया जाता है। कन्या भोज कराने वाले गर्भस्थ को बिना दोष मिटाने का प्रयास करते हैं। यह आडंबर ही तो है। यदि सच में हम नारी को सम्मान देते हैं तो हमें बालिकाओं को खुला आसमान देना चाहिए। - वंदना मिश्रा
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