श्रावस्ती। बाढ़ के दौरान श्रावस्ती के नक्शे से एक गांव खत्म हो गया। चार गांवों पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। जबकि सैकड़ों हेक्टेअर खेत राप्ती के मुहाने पर हैं। एक सप्ताह के अंदर श्रावस्ती के नक्शे में कई स्थानों पर फेरबदल की संभावना बढ़ती जा रही है।
राप्ती नदी में आई बाढ़ ने आम लोगों के जनजीवन को एक सप्ताह के अंदर अस्तव्यस्त कर दिया। बाढ़ प्रभावित करीब 1500 लोग एक सप्ताह के बाद भी राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। जिले के 66 राहत शिविर पूरी तरीके से इन पीड़ितों से खचाखच भरे हैं। एक पक्का मकान नदी में बह चुका है। सरकारी आंकड़ों में 17 मकान अब तक जमीदोज हो चुके हैं। इनमें से 12 मकान तो केवल शुक्रवार को ही गिरे हैं।
यदि इन्हीं आंकड़ों पर विश्वास करें तो 1,04,732 लोग बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें से प्रशासन ने 8,820 लोगों को अब तक सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का दावा किया है। लेकिन इन आंकड़ों में उस गांव का नाम अभी तक दर्ज नहीं हुआ है जो श्रावस्ती के नक्शे से गायब हो चुका है। ऐसा ही एक गांव रमनगरा था। जो राप्ती के मुहाने पर बाढ़ के पहले दिन से ही था।
इस गांव में छह अक्तूबर से ही लगातार कटान शुरू हो गई थी। गांव के लोग प्रशासन से मदद की गुहार कर रहे थे। लेकिन प्रशासन इस भयावह स्थिति में नदी के दूसरी ओर खड़ा मजबूरी से गांव को कटता देख रहा था। स्थिति यह थी कि यह गांव धीरे-धीरे करके श्रावस्ती के नक्शे से खत्म हो गया। ऐसे ही अशरफा गांव शुक्रवार तक 65 फीसदी तक कट चुका है। कटान की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों को आशंका है कि 24 घंटें के अंदर यह गांव भी जिले के नक्शे से गायब हो जाएगा। ऐसे ही जोगिया, मध्यनगर, मनोहरापुर सहित कई अन्य गांवों में तेजी से कटान हो रही है। जिसके चलते ग्रामीण भयभीत हैं।