बौद्ध तपोस्थली में बोधि वृक्ष की पूजा करते हिमाचल से आए अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को हिमाचल प्रदेश से आए 40 अनुयायियों से गुलजार रही। अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में बोधि वृक्ष पर पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की और तपोस्थली के विभिन्न स्थलों का भ्रमण किया। इसके बाद विपश्यना केंद्र पर ध्यान भी लगाया।
अनुयायियों को विपश्यना ध्यान की जानकारी देते हुए बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि विपश्यना ध्यान केंद्र की अनोखी तकनीक व सिद्धांत ने इसे प्रचलित किया है। यह ध्यान की बहुत प्राचीन विधि है, जिसे आज से 2500 साल पहले गौतम बुद्ध ने खोजा था।
बताया कि भगवान बुद्ध ने इसी ध्यान की तकनीक से बुद्धत्व को प्राप्त किया। विपश्यना शब्द का अर्थ होता है- अंदर से देखना। इसका संदेश है कि जो चीजें जैसी हैं, उसे वैसे ही देखना चाहिए। विपश्यना सत्य और वर्तमान पर फोकस करता है। इस ध्यान की खास बात है कि यह ध्यान आपको भूतकाल की चिंताओं और भविष्य की आशंकाओं में जीने के बजाय आज के बारे में सोचने के लिए कहता है।