श्रावस्ती (तुलसीपुर)। महाभारत में युधिष्ठिर ने यक्ष प्रश्न के उत्तर में कहा था कि धरती पर सबसे बड़ा दुख पिता द्वारा बेटे को कंधा देना है।
युधिष्ठिर का यह उत्तर सोनवा थाना क्षेत्र के बरावा हरगुन गांव में हुई घटना को सत्य साबित करता है, जहां बेटे की मौत का सदमा माता-पिता नहीं सह सके।
दोनों ने एक के बाद एक दम तोड़ दिया। एक ही परिवार से तीन अर्थियां उठने से गांव में मातम छाया हुआ है। तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं।
सोनवा थाना क्षेत्र के बरावा हरगुन निवासी शिवकुमार (54) की गुरुवार रात मौत हो गई। वह कुछ दिनों से बीमार थे। बेटे की मौत का सदमा पिता प्रेम नारायण (78) झेल नहीं सके।
शुक्रवार को जब परिवारीजन शिव कुमार के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, उसी समय प्रेम नारायण की भी मौत हो गई। परिवारीजनों ने दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया।
पति व बेटे की मौत के बाद से पद्मावती देवी (74) भी सदमे में आ गई। उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। शनिवार सुबह पद्मावती देवी ने भी दम तोड़ दिया। घटना के बाद घर में कोहराम मच गया।
गांव में मातम
ग्रामीणों के अनुसार प्रेम नारायण व उनकी पत्नी के मृत्यु का दिन अलग-अलग था लेकिन समय सुबह साढ़े छह बजे ही था। पुत्र के मोह में माता-पिता की मौत की खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव में मातम छाया है।