कटरा (श्रावस्ती)। चौधरी राम बिहारी बुद्ध इंटर कॉलेज कटरा में सोमवार को महाराजा सुहेलदेव विजयोत्सव मनाया गया। जिसकी शुरुआत विद्यालय के प्रधानाचार्य ने किया। इस दौरान मौजूद वक्ताओं ने उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य मुन्ना लाल यादव ने कहा कि 11वीं सदी के प्रारंभिक काल में भारत में एक घटना घटी थी। जिसके नायक श्रावस्ती सम्राट वीर सुहेलदेव राजभर थे। राष्ट्रवादियों पर लिखा हुआ कोई भी साहित्य तब तक पूर्ण नहीं कहलाएगा। जब तक उसमें राष्ट्रवीर श्रावस्ती सम्राट वीर सुहेलदेव राजभर की वीरगाथा शामिल न हो।
किदवंतियों के अनुसार वह सुहेलदेव, सकर्देव, सुहिर्दाध्वज राय, सुहृदेव, सुह्रिदिल, सुसज, शहर्देव, सुहिल्देव और सोहेलदेव जैसे कई नामों से जाने जाते हैं। उनका जन्म वर्ष 1009 में वसंत पंचमी पर हुआ था। इनके पिता बिहारिमल व माता जयलक्ष्मी थीं। सुहेलदेव तीन भाई व एक बहन थे। बहुमुखी प्रतिभा एवं लोकप्रियता को देखकर मात्र 18 वर्ष की आयु में उनका राजतिलक कर दिया गया था।
मलहू राजभर जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि सुहेलदेव में राष्ट्रभक्ति का जज्बा कूट-कूटकर भरा था। राष्ट्र में प्रचलित भारतीय धर्म, समाज, सभ्यता व संस्कृति की रक्षा को वह अपना कर्तव्य मानते थे। राष्ट्र की अस्मिता से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। 19वीं सदी के अंतिम चरण में अंग्रेज इतिहासकारों ने जब उनके बारे में बताया तब उनका महत्व देशवासियों की समझ में आया। इस मौके पर शशी भूषण शुक्ला, तेज कुमार वर्मा, राजेश कुमार यादव, रवि पांडे, व्यास मुनि शुक्ला, अभिमन्यु यादव, अंगद उपाध्याय आदि लोग मौजूद रहे।