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एडवाइजरी पाक्सो

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श्रावस्ती। मासूमों के साथ दरिंदगी के मामले में पुलिस की जांच ही आरोपियों को सजा दिलाने में बाधक होती है। वर्ष 2014 से अब तक लिखे गए 40 मामले ऐसे हैं जिसमें पुलिस अभी तक जांच कर रही है। जबकि तीन मामलों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा कर कोर्ट भेज दिया है। कुछ ऐेसे मामले हैं जिसमें पुलिस ने थाने की चौखट से ही पीड़ितों को घर वापस भेज दिया। पुलिस की सुस्त जांच या फिर गवाहों के मुकरने के कारण ही न्यायालय में आरोपियों को मिलने वाली सजा का औसत भी कम रहा।
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मासूमों के साथ आए दिन हो रही दरिंदगी को लेकर पूरे देश में गुस्सा है। लोग आरोपियों को कठोर सजा दिलाने की मांग कर रहे है। आम लोग त्वरित फैसले की मांग भी कर रहे हैं। जिले में मासूमों के साथ की गई दंरिंदगी व उनके आरोपियों को सजा दिलाने के मामले में कई चौकाने वाले आंकड़े मिलेे हैं। देखा जाए तो निठारी कांड के बाद 2014 में पाक्सो एक्ट बनाते हुए त्वरित न्याय के लिए सभी जिले में एक-एक न्यायालय बनाया गया था।

2014 से लेकर अब तक पूरे जिले में 235 मामले पुलिस थाने में लिखे गए थे। इसमें से 195 मामलों में पुलिस ने कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल कर दिया था। इसमें से 145 मामलों में ट्रायल जारी है। जबकि चालीस ऐसे मामले हैं। जिनकी जांच अभी भी प्रचलित है। इसमें से कुछ मामले तो 2014 के भी हैं। जिसमें पुलिस अभी तक अपना आरोप-पत्र दाखिल नहीं कर पाई।
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यही नहीं तीन ऐसे मामले भी हैं जिनमें पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया। जहां तक सजा का प्रशभन है तो इधर कुछ वर्षों में मात्र तीन आरोपियों को न्यायालय ने सजा सुनाई। जबकि चार मामले कंटेस्टेड होने के कारण छूट गए। जिस पर अपील की गई। बाकी मामले गवाहों का न्यायालय के समक्ष मामले से मुकर जाने के कारण छूट गए और आरोपियों को सजा नहीं मिल पाई।


न्यायालय ऐसे मामलों को लेकर कठोर है। हम लोग प्रयास करते हैं कि आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिले। लेकिन गवाह के मुकर जाने के बाद स्थिति बदल जाती है। कभी कभी कंटेस्टेड मामले भी छूट जाते हैं। ऐसे मामलों में सरकार अगली न्यायालय में अपील करती है।
सतीश मौर्या अपर जिला शासकीय अधिवक्ता

बाक्स में-
जिले में पाक्सो के तहत दर्ज मुकदमें
वर्ष पंजीकृत अभियोग आरोप पत्र की संख्या अभी तक विचाराधीन
2014 16 13 03
2015 26 23 03
2016 62 55 07
2017 61 54 07
2018 42 37 05
2019 28 21 07
नोट- सभी आंकड़े 31 मई 2019

थानों में प्रचलित जांच की समीक्षा की जा रही है। खास तौर से पाक्सो एक्ट की। जो मामले ज्यादा दिन से जांच में प्रचलित हैं। उनकी तत्काल जांच पूरी करके कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इकौना के एक गांव में कुछ दिन पूर्व एक अधेड़ ने एक नाबालिग से रेप कर के उसकी हत्या कर दी थी। इस मामले में न्यायालय ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी।
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बीसी दुबे एएसपी
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