श्रावस्ती। जेठ की दोपहरी में तराई की धरती भी तप रही है। ऐसे में पिछले दिनों हुई बारिश का भी कोई असर नहीं हुआ। उमस भरी भीषण गर्मी के कारण पहाड़ी नालों सहित तालाब व जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं। तालाबों व जलाशयों में पानी न भराए जाने के चलते पशु-पक्षी पेयजल के लिए भटक रहे हैं। ऐसे में सिंचाई मंत्री द्वारा दिए गए आदेश से लोगों में संकट दूर होने की उम्मीद जगी है। यदि आदेश का अनुपालन हुआ तो मवेशियों के सामने पेयजल संकट नहीं रहेगा।
जिले में कुल 1219 छोटे-बड़े तालाब हैं। इनमें 374 मनरेगा के आदर्श जलाशय भी शामिल हैं। इनमें से करीब नब्बे फीसदी तालाब कई माह से सूखे पड़े हैं जिनमें दरार पड़ चुकी है। यही हाल सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों का भी है जिनमें रेत उड़ रही है। जंगली जीवों को पेयजल संकट से बचाने के लिए वन विभाग द्वारा खोदवाए गए जलाशय में टैंकर से पानी भरवाया जा रहा है जबकि बाकी तालाब व पोखरों का कोई पुरसाहाल नहीं है। वहीं नहर में पर्याप्त पानी होने के बावजूद माइनरों में पानी न दिए जाने के कारण वे पूरी तरह सूखे पड़े हैं। ऐसे में पशु-पक्षियों के सामने पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है।
भिनगा नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में बंदर, गोवंश आदि को नालियों का पानी पीते देखा जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासन को इन सूखे तालाब में पानी भरवाने की याद नहीं आ रही है। देखा जाए तो ग्राम पंचायतों में स्थित तालाबों में अप्रैल से ही पानी भराए जाने का प्रावधान है जिसके लिए ग्राम प्रधान व सचिव राज वित्त अथवा ग्राम पंचायत निधि से रकम निकाल सकते हैं।
इसके बावजूद तालाब सूखे पड़े हैं। ऐसे में शुक्रवार को समीक्षा के दौरान सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा पंद्रह जून तक अधिकारियों को तालाब व पोखर में पानी भरवाने का निर्देश दिया गया है। इस निर्देश के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि अब पशु-पक्षियों को पेयजल संकट से निजात मिलेगी।
आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराने के लिए सभी एसडीएम व खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किया जा चुका है। बारह जून तक सभी तालाबों में पानी भरा दिया जाएगा।
-योगानंद पांडे, अपर जिलाधिकारी