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आंगनबाड़ी केंद्र बनकटी में आयोजित हुआ संवाद कार्यक्रम

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श्रावस्ती। बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। आज बेटियां अभिशाप नहीं है। वह बेटों के समान माता-पिता, जिले व देश-प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। उन्हें और आगे बढ़ाने के लिए अभिभावक बेटियों को खुला आसमान दें, ताकि वे सारी बंदिशों को तोड़कर ऊंचा मुकाम हासिल कर सकें। यह बातें रविवार को अमर उजाली की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आंगनबाड़ी बनकटी में आयोजित संवाद में कार्यकर्ताओं ने कहीं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ब्लॉक अध्यक्ष ने ग्रामीणों को शिक्षा व स्वास्थ्य के महत्व की जानकारी दी। आंगनबाड़ी संघ की ब्लॉक अध्यक्ष कुसुमलता ने कहा कि अमर उजाला की ओर से छेड़ा गया यह अभियान निश्चित ही अपना मुकाम हासिल करेगा। बच्चियों व महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान लाने की यह पहल सराहनीय है। आज बेटियां घर के चूल्हा चौका, शिक्षा, स्वास्थ्य, सीमा सुरक्षा सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। बेटियां किसी भी मामले में बेटों से पीछे नहीं हैं। इसलिए अभिभावक उन्हें आगे बढ़ने में मदद करें।

स्वास्थ्य व शिक्षा सभी के लिए आवश्यक हैं। जब बेटियां स्वस्थ होंगी तभी वह पढे़ंगी और आगे बढ़ेंगी। जब बेटियों का मन मस्तिष्क विकसित होकर कोई फैसला लेगा तो वह आगे अपराजिता बन सकेंगी। - कुसुमलता
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स्वास्थ्य ही सभी कार्यों की कुंजी है। यदि आप स्वस्थ नहीं हैं तो कुछ भी नहीं कर सकती। इसलिए सबसे पहले आपको अपने पोषण व स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। तभी स्वस्थ भारत का निर्माण संभव है। - नगीना

माता पिता व समाज को चाहिए कि वह बेटियों को आगे बढ़ने के लिए खुला आसमान दें। इससे जहां वह शारीरिक व मानसिक रूप से वे स्वस्थ होंगी, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगी। - पार्वती

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। इसलिए बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। बेटियां अभिशाप नहीं है। आज बेटियां भी माता पिता, क्षेत्र व देश-प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। - सुशीला देवी

लोग बेटों को अधिक महत्व देते हैं। उनकी गलतियों को नजर अंदाज करते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बेटा व बेटी समान प्यार के अधिकारी हैं। बेटियों को शिक्षित बनाने में कोताही न बरती जाए। - मंजू

बेटियों को चहारदीवारी में कैद कर उनकी प्रतिभा का गला घोटा जा रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए, बल्कि बेटियों को भी बेटों की तरह खुला आसमान मिले। जिससे वह भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें। - नीता

अच्छे समाज के निर्माण के लिए देश की आधी आबादी मानी जाने वाली महिलाओं व बच्चियों को भी समाज में भागीदारी के लिए समान मौका दिया जाए। इसके लिए सभी को जागरूक होना होगा। - किरन देवी

बेटी व बेटा में अब फर्क नहीं है। तमाम ऐसी बेटियां हैं जो बेटों का हक अदा कर रही हैं। ऐसे में बेटियों का स्वास्थ्य व शिक्षा का ख्याल रखा जाए, ताकि वह आगे बढ़ कर सभी का नाम रोशन कर सकें। - शकुंतला

केंद्र और प्रदेश सरकार वर्तमान में बेटियों को आगे बढ़ने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। माता पिता को चाहिए कि वह इन योजनाओं का लाभ लें, तथा बेटियों को आगे बढ़ाने में मदद करें। - रमकला

बालिका शिक्षित होगी तो वह पूरे परिवार का ख्याल रख सकेगी। ऐसे में उसे स्वस्थ व शिक्षित बनाना बेहद जरूरी है। इसके लिए बेटों व बेटियों की उचित देखभाल कर उन्हें बेहतर शिक्षा दिलाई जाए। - सुशीला
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