बदला-नानपारा मार्ग पर बिना ग्रिल व शीशे के फर्राटा भरती स्कूल वैन। - संवाद
श्रावस्ती/गिरंट बजार। निजी विद्यालयों के संचालक पढ़ाई व स्कूली वाहन के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। बच्चों को स्कूली वाहन से सुरक्षित उनके घर पहुंचाने का दावा भी करते हैं, लेकिन धरातल पर ये दावा खोखला साबित हो रहा है।
विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का फायदा उठाकर स्कूली वाहन के नाम पर बच्चों को मानक विहीन वैन व ई रिक्शों से घर भेजा जाता है। ऐसा तब है जब शासन की ओर से सभी स्कूली वाहनों का विवरण उत्तर प्रदेश एकीकृत स्कूल वाहन प्रबंधन पोर्टल (यूपीआईएसवीएमपी) पर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। इसकी निगरानी डीएम स्वयं करते हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते पंजीकृत 132 स्कूली वाहनों से अधिक वाहन फर्राटा भर रहे हैं।
परिवहन विभाग की ओर से विद्यालयों को बस व छोटे वाहनों का परमिट तो जारी कर दिया जाता है, लेकिन वाहनों की गुणवत्ता की जांच नाममात्र ही की जाती है। ऐसे में कहीं बिना ग्रिल व शीशे के छोटे वाहन संचालित होते नजर आते हैं तो कहीं बिना अटेंडेंट के।
निर्धारित गति सीमा से अधिक गति में वाहन फर्राटा भरते देखे जा सकते हैं। हालांकि विभाग की ओर से वाहनों के संचालन में पारदर्शिता लाने के लिए अभियान चलाकर सत्यापन कराया जाता है। साथ ही सभी विद्यालयों में संचालित वाहनों को विभागीय पोर्टल पर दर्ज कराया जाता है।
बीते दिनों विभाग की ओर से हुई जांच में दो वाहन मानक विहीन मिलने पर उनके फिटनेस को रद्द करने की कार्रवाई की गई। जिले के 54 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें 132 वाहनों का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह से यदि और गहनता से जांच की जाए तो शायद कई वाहन मानक को पूरा करने के आरोप में प्रतिबंधित हो सकते हैं।
सघनता से कराई जाएगी स्कूल वाहनों की जांच
सहायक संभागीय अधिकारी विनीत कुमार मिश्रा ने बताया कि 15 अप्रैल तक अभियान चलाकर वाहनों की जांच कराई जा रही है। साथ ही पोर्टल पर वाहनों के पंजीकरण की भी कार्रवाई की जा रही है। अभियान पूरा होने के बाद स्कूल वाहनों की सघनता से जांच कराई जाएगी। सड़क पर मानक विहीन वाहन संचालित मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।