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मरीजों को गोद में अस्पताल पहुंचाते तीमारदार

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श्रावस्ती। जिला चिकित्सालय में भौतिक सुविधाएं होने के बाद भी मरीजों और तीमारदारों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। एंबुलेंस व अन्य साधन से चिकित्सालय पहुंचने वाले मरीजों को गोद में लेकर तीमारदार वार्ड तक पहुंचाते हैं।
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इसका मुख्य कारण इन संसाधनों को उपयोग करने वाले कर्मचारियों की तैनाती न होना है। यही नहीं अस्पताल के अंदर व बाहर व्याप्त गंदगी व अव्यवस्था भी मरीजों व तीमारदारों के लिए परेशानी का सबब बनी है।

अधिकारियों की जानकारी के बाद भी इन समस्याओं को समाप्त नहीं किया जा रहा है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में लगभग सभी संसाधन उपलब्ध हैं। इसके बाद भी इन संसाधनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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ऐसा ही कुछ बुधवार को चिकित्सालय में प्रसव कक्ष के पास देखने को मिला। प्रसव कक्ष के सामने मैदान में जल भराव व गंदगी से मरीज व तीमारदार परेशान रहे। अंदर जीने के नीचे एक टूटी हुई व्हील चेयर खड़ी मिली।

इसका उपयोग काफी दिनों से नहीं हुआ। इसके आसपास काफी गंदगी भी नजर आई। इसके अलावा जिला अस्पताल में कहीं भी स्ट्रेचर दिखाई नहीं दिया।

प्रसव के लिए मरीज लेकर आएं अटेंडेंट राम निवास ने बताया कि वह रात को एंबुलेंस से आया था। एंबुलेंस ने प्रसव कक्ष के सामने ही मरीज को छोड़ दिया।

वहां से वह खुद मरीज को किसी तरह वार्ड तक ले गया था। वहीं इमरजेंसी की ओर स्ट्रेचर तो दिखा, लेकिन इसको ले जाने वाले कर्मचारी नहीं नजर आए।

इससे एंबुलेंस से आए आपात कालीन मरीजों के तीमारदारों को खुद ही स्ट्रेचर का उपयोग कर अंदर ले जाना होता है। कई बार ड्यूटी चिकित्सक के दबाव के बाद ही कोई वार्ड बॉय या सफाई कर्मी स्ट्रेचर एंबुलेंस तक लेकर जाता है।

यहां कभी फुल नहीं होते बेड
संयुक्त जिला चिकित्सालय संसाधन होने के बाद भी केवल रेफरल सेंटर के रूप में काम करता है। कोई भी गंभीर मरीज आते ही उसे बहराइच अथवा गोंडा जिला चिकित्सालय भेज दिया जाता है।

यहां केवल वहीं मरीज भर्ती होते हैं, जिनको सामान्य सर्दी, जुकाम व अन्य परेशानी होती है। या फिर जो अर्थिक रूप से कहीं भी जाने की स्थिति में समर्थ नहीं होते।

संयुक्त जिला चिकित्सालय में मानव संसाधन की कमी है। इसके चलते मरीजों को त्वरित सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। इसके बाद भी मरीजों को हर संभव लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है।
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- यूसी तिवारी, सीएमएस
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