श्रावस्ती। शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार का दावा करने वाली प्रदेश सरकार के शिक्षा राज्यमंत्री के गृह जनपद में ही शिक्षा का हाल बेहाल है। अर्द्धवार्षिक परीक्षा के दौरान ही यहां विद्यालय का ताला नहीं खुल रहा है।
जबकि इसकी बीएसए व अन्य अधिकारियों को खबर तक नहीं है। ऐसे में यहां शिक्षणरत छात्र छात्राएं भगवान भरोसे हैं। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के द्वितीय सत्र की परीक्षा सोमवार से प्रारंभ हुई।
पहले दिन कक्षा एक से आठ तक की हिंदी की परीक्षा कराई गई। इस दौरान विद्यालय के पंजीकृत सभी छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य की गई थी।
परीक्षा में लिखित कापियों का मूल्यांकन कराकर उसकी आख्या भी सोमवार को ही बीएसए कार्यालय को उपलब्ध कराना था।
इस परीक्षा में विभाग द्वारा कितनी पारदर्शिता बरती गई होगी। यह बताने के लिए यह तस्वीर ही काफी है। यह है भिनगा नगर से सटे हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र का उच्च प्राथमिक विद्यालय अवधूतनगर जिसमें सोमवार को परीक्षा के दिन ताला लटक रहा था।
यहां शिक्षणरत कक्षा छह की छात्रा खुशबू देवी ने बताया कि करीब दो माह से विद्यालय का ताला नहीं खुला है। यहां तैनात शिक्षक व शिक्षक विद्यालय नहीं आए।
कक्षा सात की छात्रा शांति देवी व प्रीती देवी ने बताया कि दीपावली के बाद से विद्यालय का ताला नहीं खुला है। हम रोज विद्यालय आते हैं, लेकिन शिक्षक के न आने के कारण बगल में संचालित प्राथमिक विद्यालय में बैठ जाते हैं।
छात्राओं का यह कथन परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहा है। वह भी तब जब प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार का दावा कर रही है।
मुख्यमंत्री की जांच में भी खुल चुकी पोल
पूर्व में जिले के दौरे पर आए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ द्वारा परिषदीय विद्यालयों का निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था का हाल जानने का प्रयास किया गया।
इस प्रयास के दौरान हर बार बेसिक शिक्षा विभाग फिसड्डी साबित हुआ। इसके बावजूद न तो शिक्षकों की कार्य प्रणाली में कोई बदलाव आ रहा है। और न ही अधिकारी ही व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीर दिख रहे हैं।
विद्यालय बंद होने की जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी कि किन कारणों से विद्यालय में ताला लगा हुआ है।
- ओमकार राणा, बीएसए