श्रावस्ती। तराई में मौसम का मिजाज बदल रहा है। इससे फसलों को लेकर जहां किसानों की चिंता बढ़ गई है वहीं आम लोग परेशान हैं। पर्याप्त कोहरा न होने के चलते गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है।
लोगों की परेशानी का कारण मौसम में थोड़े से समय में होने वाला परिवर्तन है। सुबह-शाम कोहरे व सर्द हवा से जहां लोगों को ठंड का अहसास हो रहा है।
दिन में कुछ समय के लिए निकलने वाली धूप गर्म कपड़े उतारने पर मजबूर कर रही है। तराई में हर साल जनवरी की शुरूआत के साथ ही भीषण कोहरे का प्रकोप शुरू हो जाता था।
इस दौरान आर्द्रता बढ़ने के कारण गेहूं की फसल बेहतर होती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। सुबह शाम कुछ समय के लिए कोहरा दिख रहा है, इसके बाद मौसम अचानक साफ हो जाता है।
ठंडी हवा का असर तेज रहता है। मौसम साफ हो जाने के कारण किसानों को फसल के लिए जमीन में जो आर्द्रता मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पाती। वहीं दिन के मौसम में लगातार परिवर्तन होता रहता है।
ठंडी तो कभी गर्मी के कारण लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। इसके कारण लोगों को धूप में गर्म कपड़े उतारने पड़ते हैं तो कुछ देर बाद ही उन्हें ठंड लगने लगती है।
मौसम की इस बेरुखी का असर मसूर, अरहर, अलसी, चना, सरसों आदि फसलों पर भी पड़ रहा है। खेतों की लगातार कम हो रही नमी के कारण किसानों को पैदावार कम होने की चिंता सता रही है।
फसल अनुसंधान केंद्र बहराइच के सीनियर रिसर्च असिस्टेंट डॉ. विनोद ने बताया कि बुधवार को जिले का न्यूनतम तापमान छह डिग्री रिकार्ड किया गया। गुरुवार को तापमान में गिरावट आ सकती है।
ठंड में गरीबों की मदद को आएं आगे
श्रावस्ती। तराई में पड़ रही ठंड से गरीबों को बचाने के लिए अब समाज सेवी भी आगे आने लगे हैं। भिनगा में एक संस्था ने बुधवार को अनाथ व असहाय बच्चों को गर्म कपड़े वितरित किए।
कार्यक्रम में जिला प्रोवेशन अधिकारी मोहन त्रिपाठी ने कहा कि गरीबों की मदद करना सबसे पुनीत कार्य है। जिले में पड़ रही ठंड से गरीबों को बचाने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए।