श्रावस्ती। लकड़ी माफिया हरियाली के दुश्मन बने हैं। इन्हें जंगल किनारे संचालित ईंट भट्ठा मालिकों का संरक्षण मिला हुआ है। माफिया जंगल सहित ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिबंधित पेड़ों को काट कर रात के अंधेरे में ईंट भट्ठों पर पहुंचा रहे हैं।
इसका कई बार वन विभाग की टीम ने खुलासा भी किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। ईंट भट्ठा स्थापित करने के लिए जारी निर्देशों का जिले में अनुपालन नहीं हो रहा है।
शासनादेश के मुताबिक जंगल, मुख्य मार्ग किनारे, आबादी व बाग के निकट ईंट भट्ठों का संचालन नहीं किया जा सकता। साथ ही ईंट भट्ठों के चारों तरफ ऊंची बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराना होता है।
इस आदेश का जिले में कहीं भी अनुपालन होता नहीं दिख रहा है। एक तरफ जहां भिनगा, सोहेलवा, ककरदरी व हरदत्त नगर गिरंट में जंगल की सीमा से सटे क्षेत्रों में ईंट भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं।
इससे बौद्ध परिपथ, फोरलेन सहित भिनगा जमुनहा, लक्ष्मनपुर, सिरसिया आदि मार्ग भी अछूृते नहीं है। इनकी पटरियों के किनारे भट्ठों का संचालन हो रहा है।
इतना ही नहीं बाग व आबादी तो दूर नगरीय सीमा में भी ईंट भट्ठों का संचालन कराया जा रहा है। जंगल से सटे क्षेत्रों में ईंट भट्ठे लकड़ी माफिया के लिए पोषक बने हैं।
वन माफिया की ओर से जंगलों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रूप से प्रतिबंधित पेड़ों को काटकर भट्टों पर बेचा जा रहा है। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस व वन कर्मियों को होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
अवैध कटान का खुलासा भी कई बार वन कर्मियों ने किया। ऐसे में जंगल से सटे ईंट भट्ठे हरियाली के लिए अभिशाप बने हैं। वहीं अवैध कटान की लकड़ियों से इन ईंट भट्ठों की चिमनी धधक रही है।
डीएफओ एपी यादव ने बताया कि अब तक मामले की जानकारी नहीं थी। अगर वन माफिया अवैध रूप से पेड़ों की कटान कर रहे हैं तो इसकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।