फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौसम की बेरुखी ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रावस्ती। तराई में करीब चार माह से बरसात नहीं हुई। इससे खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। अगहन मास में भी बरसात के आसार नहीं दिखाई देने से किसानों की बेचैनी बढ़ गई है।
विज्ञापन


किसी तरह पंपिंग सेट के सहारे गेहूं की बोआई कर चुके किसान अब दहलनी व तिलहनी फसलों को लेकर चिंतित देखे जा रहे हैं।

खेतों को पलेवा कर गेहूं की र्बोआई कर चुके किसान अब अपनी दलहनी व तिलहनी फसलों को लेकर परेशान हैं। उनकी इस परेशानी का कारण अगस्त से अब तक जिले में बरसात का न होना है।

बरसात न होने के कारण खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। ऐसे में खेतों में लगी अरहर, मसूर, चना, मटर, सरसों, लाही, तोरिया आदि फसलें प्रभावित होने लगी हैं।
विज्ञापन


सुबह शाम पड़ने वाले कोहरे के कारण अरहर, सरसों, लाही व तोरिया आदि की फसलों का विकास भी रुकने लगा है। किसानों का मानना है कि यदि हेवती (शरद ऋतु में होने वाली बरसात) न हुई तो जहां पौधों का विकास रुक जाएगा, वहीं फसल सूख सकती है। इससे पैदावार में भारी गिरावट आएगी। इसको लेकर किसान बेचैन हैं।

हल्की सिंर्चाई करें किसान
जिला कृषि अधिकारी आरपी राना ने बताया कि काफी समय से बरसात न होने के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

ऐसे में संभव हो तो किसान खेत की हल्की सिंचाई करें। सिरसिया आदि क्षेत्रों में जहां सिंचाई के संसाधन नहीं है, वहां के किसान सात से आठ ग्राम डीएपी प्रति लीटर पानी में मिलाकर अरहर, मसूर, चना, मटर, सरसों, लाही, तोरिया आदि के खेतों में दवा की तरह छिड़काव करें। इससे जरूर फायदा मिलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें