जेतवन परिसर में प्रार्थना करते अनुयायी।
- फोटो : जेतवन परिसर में प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को बर्मा व अमेरिका से आए अनुयायियों के दल से गुलजार रही। बर्मा से आए 60 व अमेरिका के 40 अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में जेतवन परिसर की परिक्रमा की और पारंपरिक तरीके से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा भी हुई।
सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि दर्शन का प्रमुख विचार मध्यम मार्ग के नाम से जाना जाता है। सूक्ष्म दार्शनिक स्तर पर तो इसका अर्थ कुछ भिन्न है, लेकिन लौकिकता के स्तर पर इसका अभिप्राय सिर्फ इतना है कि किसी भी प्रकार के अतिवादी व्यवहार से बचना चाहिये। बुद्ध दर्शन का दूसरा प्रमुख विचार संवेदनशीलता है।
संवेदनशीलता का अर्थ है दूसरों के दुखों का अनुभव करने की क्षमता। बुद्ध ने जानबूझकर अधिकांश पारलौकिक धारणाओं को खारिज किया। बुद्ध दर्शन में व्यक्ति को अहंकार से मुक्त होने की सलाह दी गई है। अनुयायियों ने बौद्ध तपोस्थली के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।