शामली। जैन मुनि 108 विव्रत सागर महाराज ने कहा कि भौतिक जीवन की सफलताओं के साथ व्यक्ति को मरणोपरांत और अगले जीवन की सफलता के लिए भी कार्य करने चाहिएं।
दिगंबर जैन धर्मशाला में बुधवार को प्रवचन करते हुए जैन मुनि ने कहा कि मनुष्य योनि में जन्म लेने के बाद हर जीव सफल होना चाहता है, चाहे वह विद्यार्थी हो, दुकानदार हो या नौकरीपेशा व्यक्ति हो। हर अवस्था में व्यक्ति सफलता की ऊंचाइयों को छूना चाहता है। बचपन में खिलौना मिलना, विद्यार्थी जीवन में अच्छे अंक प्राप्त करना, नौकरी में पदोन्नति या व्यापार में सफलता और गृहस्थ जीवन में परिवार का पालन-पोषण करना, ये सभी सफलता के अलग-अलग रूप हैं।
भौतिक जीवन की सफलताओं के साथ व्यक्ति को मरणोपरांत और अगले जीवन में सफलता के लिए भी विचार करना चाहिए। जीवन को आनंद और भोग के साथ जीना चाहिए, लेकिन उसके साथ कुछ प्रयोग भी करना चाहिए ताकि जीवन का अंत सम्मानजनक हो और अगले जीवन में भी सफलता प्राप्त हो।
जैन मुनि ने कहा कि संसार में मिलने वाले सुख अस्थाई और भ्रामक हैं। तीर्थंकर भगवान की स्पष्ट घोषणा है कि इस संसार में सच्चा सुख नहीं है। वास्तविक सुख अपनी आत्मा के स्वभाव में है और उसे प्राप्त करने के लिए तैयारी करनी होगी। संजीव जैन ने बताया कि बृहस्पतिवार को मोक्ष सप्तमी पर 23वें तीर्थंकर 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।