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मां गौरी से कामना, श्रीराम जैसा मिले पति

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शामली हनुमान धाम पर श्री रामलीला में फुलवारी लीला का अभिनय करते कलाकार - फोटो : SHAMLI
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शामली। श्री मंदिर हनुमान टीला हनुमान धाम की स्वर्ण जयंती रामलीला महोत्सव के दौरान फुलवारी लीला का मंचन किया गया। जनकपुरी मेें वाटिका में श्रीराम और सीता की मुलाकात होती है। दोनों एक दूसरे को देखकर आकर्षित होते है। सीता मां गौरी से मंदिर श्रीराम जैसा पति की कामना करती है।
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शनिवार रात श्री मंदिर हनुमान टीला हनुमान धाम के रामलीला महोत्सव में विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को लेकर गंगा घाट के पास आते हैं, वहां पर उनकी भेंट पंडितों से होती हैं। वह कहते हैं हम गंगा पार कर आएंगे, परंतु विश्वामित्र कहते हैं, जो पूरी वंशावली सुनाएगा उसको ही गंगा पार कराने का मौका मिलेगा। इस प्रकार एक पंडित भगवान राम की वंशावली सुनाता है। इस प्रकार वह गंगा पार होते है। श्रीराम लक्ष्मण को साथ लेकर ऋषि विश्वामित्र मिथिला नगरी में पहुंचकर विश्राम करते हैं। वहां मिथिला के राजा जनक द्वारा ऋषि विश्वामित्र और राम-लक्ष्मण का स्वागत किया जाता है। ऋषि विश्वामित्र को अलग रहने की व्यवस्था की जाती है। ऋषि विश्वामित्र की पूजा के लिए श्रीराम-लक्ष्मण पुष्प लेने के लिए वाटिका में जाते हैं। वाटिका का सौंदर्य देखकर लक्ष्मण के मन में कुछ कहने की इच्छा हुई, दिल कहे रुक जा रे, रुक जा यहीं पर कहीं जो बात इस जगह और कहीं नहीं। इस प्रकार राम जी भी कह रहे हैं वाकई वाटिका में इतना सौंदर्य है कि इसका बखान नहीं कर सकते है, मन यहीं पर ठहर जाएं । यहां पर पत्ते पत्ते में खुशबू ही खुशबू हैं। सखियों के साथ सीता फुलवारी में आती है। गीतों भरी लीला में गीतों को गुनगुनाते हुए झूमते हुए सखियों के साथ खेल रही हैं। खेलते- खेलते एक सखी की नजर राम-लक्ष्मण पर पड़ती हैं, और उनका सौंदर्य देखकर पागल सी हो जाती है। सीता को बताती हैं और सीता राम जी को देखते हैं। मन ही मन में मां गौरी से आशीर्वाद चाहती हैं कि मेरा विवाह इन्हीं से हो। इस प्रकार राम जी भी सीता को देखते है। दोनों के बीच में चाहत बढ़ती है। अंत में सीता सखियों के साथ मंदिर में मां गौरी की आरती करती है। वाटिका का सुंदर दृश्य को लाल सिंह लचक, दीपक सैनी, विजय कुमार ने तैयार किया। डायरेक्टर वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, आदेश शर्मा दिनेश पाठक और उत्तम नामदेव रहे।
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