शामली में मजदूरों को लेकर गुजरती हरियाणा रोडवेज की बस।
- फोटो : SHAMLI
जेब खाली हो गई तो पैदल ही गांव को निकल पड़े
कैराना (शामली)। गुजरात के गांधीनगर में 500 रुपये दिहाड़ी पर सिलाई का काम करता था। उसके चार-पांच साथी और थे। लॉकडाउन हुआ तो काम धंधा चला गया। कुछ दिन घर में रहे। जो रुपये थे खत्म होने लगे। दिन में एक बार प्याज नमक से रोटी खाई। जेब खाली हो गई तो पैदल ही गांव के लिए निकल गए, लेकिन हरियाणा में पुलिस ने पकड़ लिया तभी से वहां एक स्कूल में रखा। वहां दो वक्त की रोटी नसीब हुई। हरियाणा से कैराना पहुंचे सीतापुर के सुफियान ने लॉकडाउन के चलते खुद पर बीती सुनाई तो हर किसी का कलेजा भर आया।
उन्नाव निवासी हजरत ने बताया कि वह लुधियाना में धागा फैक्ट्री में काम करता था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया। जो रुपये जेब में थे पांच दिन तक रोटी खाई। पैसे खत्म हो गए तो मकान मालिक को समस्या बताई। उसने 500 रुपये किराए के देकर कहा कि घर चले जाओ। साधन नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए। जगाधरी में पुलिस ने रोक लिया। वहां उन्हें एक राधा स्वामी सत्संग व्यास में रखा गया जहां तीन दिन बाद रोटी नसीब हुई थी। और अब यहां लाया गया।
लखीमपुर खीरी निवासी रोहित ने बताया जयपुर में सिलाई का काम करता था। लॉकडाउन के बाद दो-तीन दिन तक अपने पैसों में खाना खाया, लेकिन बाद में पैसे खत्म हो गए तब कुछ लोगों ने उनके पास खाना भिजवाया था। इसके बाद 30 मार्च को वह जयपुर से घर जाने के लिए पैदल ही चला था। 31 मार्च को हरियाणा के बावल में पैदल पहुंच गया था, लेकिन पुलिस ने आगे नहीं जाने दिया तथा वहीं स्कूल में रखा। जब उन्हें घर पहुंचाने की जानकारी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
शामली में मजदूरों को लेकर गुजरती हरियाणा रोडवेज की बस।- फोटो : SHAMLI