शामली। मौसम में बदलाव के कारण खांसी, सांस और शुगर के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल का हाल ये है कि करीब एक माह से खांसी का सिरप खत्म है तो 20 दिन से दर्द निवारक डाइक्लोफिनेक जैल और शुगर की मेटफोरमिन दवा दस दिन से खत्म चल रही है। रोजाना 300 से ज्यादा मरीज बिना दवा के वापस जा रहे हैं।
जिला अस्पताल में वायरल संक्रमण के मरीज बढ़ रहे हैं। ओपीडी में 1300 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें खांसी और सांस के मरीज भी बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही जोड़ों में दर्द के मरीज भी आ रहे हैं, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल पा रही है। बिना दवा के मायूस होकर वापस जाना पड़ रहा है। खांसी का सिरप बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी आयु के मरीजाें को दिया जाता है। सांस के मरीज को भी खांसी के सिरप की जरूरत होती है, लेकिन एक महीने से खांसी का सिरप खत्म चल रहा है। सिरप न मिलने से रोजाना 100 से 120 मरीज वापस जा रहे हैं। दर्द निवारक डाइक्लोफिनेक जैल करीब 20 दिन पहले खत्म हो चुका है। इसके 50 से 60 मरीज रोजाना बिना दवा के लौटने को मजबूर हैं। इसके अलावा करीब दस दिन पहले शुगर की गोली मेटफोमिन भी 10 दिन पहले खत्म हो चुकी है। शुगर के 60-70 मरीज रोजाना आते हैं, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल रही है।
दवा खत्म होने की वजह बजट का अड़ंगा
जिला अस्पताल को कारपोरेशन के माध्यम से दवा उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए शासन स्तर से कारपोरेशन को वर्चुअल बजट भेजा जाता है। बताया गया है कि पिछले वित्तीय वर्ष की बजट की धनराशि खत्म हो चुकी है और नए वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट अभी जारी नहीं हुआ है। यदि बजट जारी नहीं होता तो अस्पताल में अन्य कई तरह की दवाओं की कमी हो सकती है।
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ये बोले मरीज
कैराना निवासी शौकीन ने बताया कि उसे पिछले एक सप्ताह से खांसी है। दवा लेने आया था, लेकिन यहां बताया गया कि खांसी का सिरप नहीं है।
दयानंदनगर शिवांश ने बताया उसे बुखार के साथ खांसी है। अस्पताल में बताया कि खांसी का सिरप खत्म चल रहा है।
गांव झाल निवासी मदन ने बताया कि उसे शुगर की समस्या है। जिला अस्पताल में शुगर की दवा नहीं मिली। बिना दवा के वापस जाना पड़ रहा है।
कोट
जिला अस्पताल में जो दवाएं खत्म चल रही है, उनके लिए दो बार कारपोरेशन को मांग पत्र भेजा जा चुका है। कारपोरेशन से उन्हें बजट खत्म होना बताया जा रहा है। दवाओं को मंगाने के लिए शासन स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं।
- डॉ. किशोर आहूजा, सीएमएस जिला अस्पताल।