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दिल्ली में जो हुआ वह ठीक नहीं था

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‘दिल्ली में जो हुआ वह ठीक नहीं था’
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शामली। दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुए बवाल से खाप चौधरी भी खफा हैं। वह इस तरह की हिंसा को उचित नहीं बताते। कहते हैं कि दिल्ली पुलिस-प्रशासन के साथ किसान संगठनों की भी जिम्मेदारी थी कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क रहते। किसानों को अपना आंदोलन शांतिपूर्वक ही करना चाहिए था।
गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक के पुत्र राजेंद्र मलिक कहते हैं कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड के दौरान जो भी हुआ वह ठीक नहीं है। किसानों का रास्ता हिंसा का नहीं होना चाहिए। गलती चाहे जिस स्तर से भी हुई हो लेकिन हिंसा नहीं होनी चाहिए थी। किसान जिस तरह से पहले आंदोलन कर रहे थे, उसी तरह करते रहना चाहिए था।
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कालखंडे खाप के चौधरी संजय कालखंडे का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर जो भी दिल्ली में हुआ वह उचित नहीं है। इसके लिए दोनों पक्ष ही जिम्मेदार हैं। किसान संगठनों की भी जिम्मेदारी थी और पुलिस तथा प्रशासन को भी व्यवस्था बनानी थी। लाल किले पर तिरंगे के अतिरिक्त दूसरा झंडा लगाना बेहद गलत है। हम इसकी निंदा करते हैं। किसानों को उसी तरह आंदोलन करना चाहिए था जैसा चल रहा था।
दिल्ली पुलिस की रही विफलता: सवित मलिक
शामली। किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सवित मलिक का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई हिंसा निंदनीय है। किसान शांतिपूर्वक ट्रैक्टर मार्च निकाल रहे थे। उनका किसी किसान संगठन से कुछ लेना-देना नहीं था। ट्रैक्टर परेड के लिए जो रूट निर्धारित किया गया था, उनके अलावा भी विभिन्न मार्गों से लोग दिल्ली में घुसे। इन्हें रोकने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की थी।
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पुलिस ने तय रास्तों पर लगा दी थी बैरिकेडिंग: विक्रांत जावला
शामली। रालोद नेता डा. विक्रांत जावला का कहना है कि गाजीपुर बॉर्डर से ट्रैक्टर मार्च के लिए जो रास्ता निर्धारित हुआ था पुलिस ने उसे पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया था। ट्रैक्टरों की भारी भीड़ थी और वापस आने का भी रास्ता नहीं था। जब वह बैरिकेडिंग पर पहुंचे तो वहां एक बस में तोड़फोड़ हुई पड़ी थी तथा बैरिकेडिंग भी पलटी हुईं थीं। केवल एक ट्रैक्टर के निकलने के लिए रास्ता बचा हुआ था। किसी भी प्रकार से की गई हिंसा निंदनीय है लेकिन किसानों केे इस परिस्थिति में पहुंचाने के लिए सरकार ही जिम्मेदार है। किसानों की बात नहीं सुनी गई।
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