फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shamli News: डग्गामार वाहनों के सहारे ग्रामीणों का सफर

विज्ञापन
बसों की कमी के कारण डग्गामार वाहन में खड़े होकर जाते लोग। संवाद
विज्ञापन
शामली। यूपी रोडवेज का शामली में डिपो एवं कार्यशाला न होने से जिले के ग्रामीण मार्गों पर यूपी रोडवेज की बसों का संचालन नहीं किया जा रहा है। जिससे लोगों को डग्गामार वाहनों के सहारे यात्रा करनी पड़ रही है।
विज्ञापन

शामली में पिछले 42 सालों से यूपी रोडवेज का बस डिपो बनाने की मांग चल रही है। वर्ष 2011 में शामली जिला बनने के बाद मायावती सरकार ने निगम के अनुबंधित बसाें के डिपो की स्वीकृति दी। निगम का डिपो बनाने के लिए वर्ष 2015 में शामली- मुजफ्फरनगर मार्ग पर फतेहपुर गांव में नौ बीघा भूमि का आरक्षित की गई। वर्ष 2018 में निगम के डिपो के नाम भूमि रिकार्ड में दर्ज करा दी गई। वर्ष 2019 को आरक्षित भूमि में निगम के डिपो का डिजाइन और एस्टीमेट बनाकर यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम मुख्यालय को भेजा गया। निगम मुख्यालय से शामली डिपो की बजट धनराशि आवंटित नहीं हो पाई।
शामली में निगम का डिपो अस्तित्व में नहीं आने से मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बडौत, खतौली, लोनी, छुटमलपुर, पानीपत, करनाल, सोनीपत डिपो की बसें शामली से होकर गुजरती है। शामली अनुबंधित डिपो की 40 अनुबंधित बसों का संचालन जिले के प्रमुख मार्गों पर हो रहा है। निगम की बसें नहीं होने से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के मार्गों पर सवारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले के कांधला- गंगेरू इस्सौपुर टील मार्ग, कांधला- बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर मार्ग, शामली- भौंराकलां, सिसौली मार्ग, शामली, झिंझाना, ऊन मार्ग, शामली-गढ़ीपुख्ता मार्ग, शामली- चौसाना, गंगोह मार्ग समेत कई मार्गों पर निगम की बसों का संचालन नहीं हो रहा है।
विज्ञापन

बैठक में भी उठाया जा चुका मुद्दा
जिला व्यापार बंधु की बैठक में कांधला के व्यापारी ईश्वर दयाल कंसल कांधला से बुढ़ाना मुजफ्फरनगर मार्ग पर कम से कम 15 निगम की बसों का संचालन किए जाने की मांग कर चुके हैं। कांधला के व्यापारिंयों का कहना है कि कांधला से बुढ़ाना होकर मुजफ्फरनगर यूपी रोडवेज के नहीं चलने से लोगों को डग्गामार वाहनों के सहारे रहना पड़ रहा है। इस संबंध में डीएम रविंद्र सिंह ने एआरएम अनिल कुमार शुक्ला को निगम की बसों का संचालन करने के निर्देश दिए थे। परिणाम वहीं ढाक के तीन पात रहा है। हालांकि, निगम के अफसरों को कहना है कि निगम की बसों का संचालन लंबे रूट पर किमी पूरा करने के लिए किया जाता है। इसलिए छोटे मार्गों पर निगम की बसों का संचालन करने से वह कतराते हैं।
विज्ञापन



-इंद्रपाल सिंह पांचाल-
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें