शामली। जिले में किरायेदारों के सत्यापन का कार्य नहीं हो रहा है। हालात ये है कि न मकान मालिक पुलिस को सूचना देते हैं और न ही पुलिस सत्यापन का कार्य कर पाती है। ऐसे में संदिग्ध लोग अपनी पहचान बदलकर छिपे रहते हैं। पूर्व में बांग्लादेशी यासीन और म्यांमार के चार लोगों के जिले में अवैध रूप से रहने के मामले सामने आ चुके हैं।
बाहर से आकर किराये के मकान में रहने वाले लोगों के सत्यापन किए जाने की घोषणाएं अधिकारियों द्वारा समय-समय पर की जाती रही है, लेकिन उन पर अमल बहुत कम होता है। सत्यापन का उद्देश्य यह होता है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाता है, तो उसके बारे में सही जानकारी हो सके। लेकिन जिले में पिछले काफी समय से सत्यापन का काम लगभग बंद है। इसकी वजह यह है कि बाहर से आकर रहने वाले लोगों की सूचना न तो मकान मालिक पुलिस को देते हैं और न ही पुलिस अपने स्तर पर सत्यापन कर पाती। पूर्व के मामलों को देखे तो कस्बा थानाभवन में बांग्लादेशी यासीन कई साल तक किराये के मकान में रहा।
उसने अवैध तरीके से रहते हुए पहचान पत्र और आधार कार्ड तक बनवा लिया था, लेकिन पुलिस व खुफिया विभाग को 2015 में जानकारी तब मिली, जब उसने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद यासीन फरार हो गया था, जिसका आज तक पता नहीं चल सका। दो साल पहले पुलिस ने थानाभवन और जलालाबाद में अवैध रूप से रह रहे म्यांमार निवासी रोहिंग्या समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। वे अपने नाम बदलकर रह रहे थे और शरणार्थी का दर्जा पाने के लिए आवेदन कर चुके थे। इनकी वजह समय रहते सत्यापन न होना सामने आया था।
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कोट
जिले में बाहर से आकर किराये पर रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी मकान मालिक की होती है। ऐसे लोगों के संबंध में जो भी सूचनाएं मिलती है, उनके बारे में पुलिस द्वारा सत्यापन कराया जाता है। - सुकीर्ति माधव, एसपी।