फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा सरकार के आदेश से मुश्किल में यूपी के किसान

Mon, 22 Apr 2019 12:00 AM IST
Deepak Sharma शामली/अमर उजाला/ब्यूरो
विज्ञापन
गेहूं
विज्ञापन
शामली।  हरियाणा सरकार द्वारा पहले अपने यहां के किसानों का गेहूं खरीदने के आदेश से यूपी के किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। हरियाणा के आढ़तियों से पेशगी लेने वाले किसान अब अपना गेहूं उन्हें बेचना चाहते हैं, लेकिन हरियाणा बार्डर पर ये कहकर गेहूं रोका जा रहा है कि पहले हरियाणा के किसानों का गेहूं लिया जाएगा।
विज्ञापन


हरियाणा से सटे यूपी के गांवों के किसान करनाल मंडी के आढ़तियों से पेशगी लेकर फसल बोते हैं। शर्त होती है कि तैयार होने पर फसल उन्हीं आढ़तियों को दी जाएगी। जिले के सैकड़ों किसानों ने ऐसा किया हुआ है, लेकिन अब फसल तैयार होने पर करनाल मंडी बेचने जा रहे किसानों को हरियाणा बॉर्डर पर रोका जा रहा है। इसे लेकर देर रात तक हंगामा चला।  हालांकि रेट दोनों राज्यों में 1840 रुपये प्रति क्विंटल ही हैं। किसान हरियाणा की तरह ही यहां भी गेहूं खरीद व्यवस्था की मांग उठा रहे हैं।

1.45 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य
 जिले में पिछले साल कुल 6216 किसानों से एक लाख 41, 800 क्विंटल गेहूं खरीद हुई थी, लेकिन इस साल अभी तक केवल 1037 क्विंटल ही गेहूं खरीदा जा सका है। जिले में खरीद के कुल 27 केंद्र खुले हैं इनमें से अधिकांश सूने हैं। इस साल जनपद को 1.45 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला है।
विज्ञापन


किसान बोले हरियाणा की तरह हो यूपी में खरीद
झिंझाना। नाईनंगला गांव के किसान छोटू ने बताया कि उसने करनाल के आढ़ती से फसल बोने से पहले बीज और खाद खरीदने के लिए 50 हजार रुपये नगद लिए थे। अब गेहूं की फसल तैयार हो गई है। बॉर्डर पर गेहूं रोकने से परेशानी हो रही है।   शीतलगढ़ी के किसान ज्योति गर्ग कहते हैं कि उन्होंने भी फसल से पहले करनाल के आढ़तियों से पेशगी ली थी अब फसल वहां देनी है, लेकिन गेहूं रोका जा रहा है। हमारी सरकार को भी यूपी में हरियाणा जैसी व्यवस्था कर लेनी चाहिए इससे किसानों को ही लाभ होगा। किसान पद्म और धरेंद्र कहते हैं कि किसान को फसल बोने से पहले खेत की तैयारी, जुताई, खाद बीज ,कीटनाशक आदि के लिए काफी पैसा चाहिए। करनाल के आढ़ती उनकी मदद करते हैं। इसी वजह से उन्हें गेहूं देते हैं। यूपी सरकार भी हरियाणा की तरह ही अपनी खरीद व्यवस्था बना ले तो उन्हें करनाल जाने की क्या जरूरत। यहां पर गेंहू बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन की कागजी कार्रवाई और बाद में भुगतान की समस्या होती है।


हमारे यहां भी गेहूं खरीद केंद्र खुले हैं। किसान यहां अपना गेहूं बेचे। प्रयास हो रहा है कि 48 से 72 घंटे तक  में उनका भुगतान करा दें। यदि वह किसी कारणवश हरियाणा में ही गेहूं बेचना चाहते हैं तो कुछ दिन रुक जाएं। वहां के अधिकारियों का कहना था कि उन्हें ऊपर से ही निर्देश हैं कि पहले हरियाणा के किसानों का गेहूं खरीदा जाए। इसलिए वे कुछ दिन बाद वहां जाकर अपना गेहूं बेच सकते हैं।
विज्ञापन

अखिलेश सिंह, डीएम शामली
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें