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रिम धुरा उद्योग में जीएसटी की एक समान दरें हो लागू

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रिम धुरा उद्योग में जीएसटी की एक समान दरें हो लागू
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शामली। रिम धुरा उद्योग में व्यापारी जीएसटी के 12 और 18 के स्लैब में उलझकर रह गया है। उद्यमियों ने जीएसटी के अंतर को खत्म कर एक समान दरें लागू करने, उद्योगों को बिजली की दरों में राहत दिए जाने और उद्यमियों को कच्चा माल सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की आम बजट में मांग उठाई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एक फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट में जिले उद्यमियों ने रिम धुरा, पेपर, माचिस, अगरबत्ती, थ्रेसर उद्योगों राहत दिए जाने की उम्मीद जताई है।
जीएसटी की दरों से छह प्रतिशत का रिफंड खत्म
रिम धुरा उद्योग से जुड़े और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन वेदप्रकाश आर्य का कहना है कि रिम धुरा उद्योग में जीएसटी की 12-18 की स्लैब एक होनी चाहिए। उनका कहना है कि 18 प्रतिशत की जीएसटी की स्लैब से माल आता है। 12 प्रतिशत से माल देना पड़ता है। जीएसटी के स्लैब में अंतर आने से उद्यमी की कार्यशील पूंजी सरकार की ओर रिफंड के रूप में खड़ी हो जाती है। छह प्रतिशत रिफंड के रूप में सरकार की ओर 25 सेे 30 लाख रुपये कार्यशील पूंजी के रूप में न आने से खत्म हो जाते हैं। जिससे उद्यमियों को बैंक का ऋण का ब्याज देना पड़ रहा है। रिम धुरा उद्योग में 12 प्रतिशत से लेकर 18 प्रतिशत का जीएसटी का स्लैब खत्म होकर 15 प्रतिशत होना चाहिए।
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कच्चा माल सस्ता मिले, बिजली की दरें सस्ती हों
करियर व्हील के मालिक और रिम धुरा उद्यमी आलोक जैन का कहना है कि उद्योगों के लिए कच्चा माल महंगा होता जा रहा है। कच्चा माल यदि उद्यमियों को सस्ता मिल जाए तो चीन को पीछे छोड़ सकता है। चीनी उद्योग का विश्व में कब्जा है, वहां पर कच्चा माल सस्ता है। भारत में कच्चा माल महंगा है। उनका कहना है कि उद्योगों के लिए बिजली महंगी हो गई है। बिजली उद्योगों के लिए सस्ती मिले और दस प्रतिशत बिजली की दरें वापस हों, तो उद्योग रफ्तार पकड़ सकते हैं। आयकर की छूट में सुधार की आवश्यकता है।
रिम धुरा उद्योग में जीएसटी की दरें एक समान हों
जय कृषि उद्योग के स्वामी प्रवीण जैन का कहना है कि रिम धुरा उद्योग पर पहले कोई भी टैक्स नहीं था। रिम धुरा उद्योग को जीएसटी के दायरे में लाए जाने के बाद 18 और 12 की स्लैब बना दी गई है। रिम धुरा उद्योग पर एक समान दरें लागू हों। आयकर की छूट सात और आठ लाख तक दिए जाने की आवश्यकता है। दिल्ली रोड पर रिम धुरा उद्योग से जुडे़ अनिल कुच्छल और अतुल जैन का कहना है कि रिम धुरा उद्योग में जीएसटी की स्लैब 12, 18 होने से उलझ कर रह गया है। जीएसटी की स्लैब एक हो, जिससे दो दरों का झंझट खत्म हो सके।
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विदेशों से आने वाले कच्चे माल में मिले राहत
रिम धुरा उद्योग से जुड़े जिनेंद्र कुमार जैन का कहना है कि विदेशों से आने वाली वस्तुओं को बनाने के लिए सरकार राहत देकर प्रोत्साहन दे। कृषि यंत्रों से जुडे़ उद्योगों के लिए राहत वाला बजट हो। जिससे वह घाटे से उभर सकें। वहीं, आईआईए के पूर्व चेयरमैन और पेपर उद्योग से जुड़े अशोक बंसल का कहना है कि पेपर उद्योग पर कस्टम ड्यूटी साढ़े सात प्रतिशत है। पेपर उद्योग पर इंपोर्ट कस्टम ड्यूटी पर ढाई प्रतिशत की छूट दी जाए। बाहर से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी लगाई जाए।
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