संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में हाईवे के बाईपास के दोनों ओर 100-100 मीटर के दायरे में ग्रीन बेल्ट के स्थान पर कालोनियां विकसित हो गई हैं। महायोजना लागू होने के बाद बाईपास के किनारे बसी इन कॉलोनियों में निर्माण नहीं किया जा सकेगा। मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की ओर से बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण का अभियान चलाया जाएगा।
जिले में दिल्ली-सहारनपुर, पानीपत-खटीमा और मेरठ-करनाल हाईवे के बाईपास का निर्माण चल रहा है। इन सभी बाईपास के किनारे कॉलोनियां विकसित होने लगी है। बधेव, गोहरनी, मुंडेट, तहसील, एसटी तिराहे, साईंधाम, मेपल्स स्कूल, जलालपुर, लिलौन, खेड़ी करमू, कैराना रोड पर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में बामनौली, शेखपुरा, कंडेला, ऐरटी, जगनपुर, सिंभालका, सेहटा आदि गांव में कालोनियां विकसित हो गई हैं।
दूसरे जिलों से भी आ रहे कालोनाइजर
बाईपास के किनारे मेरठ, करनाल, बागपत और मुजफ्फरनगर आदि जिलों के कालोनाइजर कृषि भूमि खरीदकर कॉलोनियां काट रहे हैं। जिससे कृषि भूमि के दाम आसमान तक पहुंच गए है। बनत बाईपास और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के शामली बाईपास में सबसे ज्यादा कॉलोनियों विकसित हो गई है। हालॉकि जिला मुख्यालय के आसपास गांवों में एक करोड़ रुपये प्रति बीघा तक भाव पहुंच गए है। प्राधिकरण कार्यालय प्रभारी व अवर अभियंता राजीव त्यागी का कहना है कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड का नियम शामली महायोजना से संबद्घ कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर 60-60 मीटर तक और बाईपास के किनारे 100-100 मीटर तक दोनों ओर ग्रीन बेल्ट है। शामली महायोजना लागू होने के बाद बाईपास के किनारे कॉलोनियों का सर्वे करके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
चार कालोनियां वैध, 100 से ज्यादा अवैध
मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण के सचिव महेंद्र प्रसाद का कहना है कि शामली नगर पालिका परिषद की सीमा खत्म होने के बाद एक-एक किमी क्षेत्र का दायरे में प्राधिकरण की सीमा शुरू होती है। उनका कहना है कि एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के नियमानुसार बाईपास के दोनों ओर 100-100 मीटर के दायरे में ग्रीन बेल्ट रहेगी। महायोजना लागू होने के बाद बाईपास के किनारे विकसित हो रही कॉलोनियों का सर्वे कराकर अवैध मानकर चिन्हांकन किया जाएगा। इसके बाद मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण अवैध कालोनी मानकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। उनका कहना है कि मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की सिर्फ शामली जिले में चार कालोनी वैध और सौ से ज्यादा कॉलोनी अनधिकृत तरीके विकसित हो गई हैं।