शामली। वेस्ट यूपी के कई जिलों को जोड़ने वाले पूर्वी यमुना नहर पर गंदवेडा दो लेन और कैराना- खतौली- मोरना मार्ग पर भभीसा गांव में रजबहे के पुल को उत्तर प्रदेश शासन ने स्वीकृत किया है। शासन ने दोनों पुलों का शासनादेश शुक्रवार को जारी कर दिया। जल्द ही शामली जिले में दोनों पुलों का निर्माण शुरू हो जाएगा।
शासन द्वारा स्वीकृत किए गए दोनों पुलों में एक पुल शामली जिले के जलालाबाद- गंगोह सहारनपुर मार्ग पर गंदेवडा संगम में पूर्वी यमुना नहर और दूसरा पुल कैराना- खतौली- मोरना मार्ग पर भभीसा के पास रजबहे का पुल शामिल है। शामली, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिले को जोड़ने वाले पुल के निर्माण होने से यहां की जनता को लाभ होगा। लोक निर्माण विभाग दोनों नए पुल का निर्माण कराएगा।
शामली जिला और सहारनपुर जिले को जोड़ने वाले दिल्ली-शामली, सहारनपुर से जलालाबाद- गंगोह मार्ग पर पूर्वी यमुना नहर पुल किमी 65 में गंदवेडा संगम पूर्वी यमुना पुल खस्ता हाल में चल रहा था। शामली जिले का गंदेवडा संगम पर्यटक के रूप में विकसित होने बाद पूर्वी यमुना नहर पर नए पुल के निर्माण की मांग की गई थी। दूसरी ओर कैराना- खतौली, मोरना राज्य मार्ग पर भभीसा गांव के पास रजबहे पर नए पुल की मांग पर उत्तर प्रदेश शासन ने 14 नए पुलों को स्वीकृति की गई है। शासन के विशेष सचिव लाल धीरेंद्र राव ने मुख्य अभियंता सेतु लोक निर्माण विभाग को शासनादेश में अवगत कराया कि शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र के जलालाबाद- गंगोह- नुकड सहारनपुर पर गंदेवडा संगम पर पूर्वी यमना नहर पर नवीन पुल पर 65 किमी पर चार करोड़ 28 लाख 70 हजार रुपए खर्च होंगे। शामली जिले में कैराना- खतौली, मोरना राज्य मार्ग पर 17 किमी पर भभीसा गाव के पास 93.94 लाख रुपये खर्च होगे। शासन ने दोनों पुलों की स्वीकृति दी है। शुक्रवार को जारी हुआ शासनादेश जिला मुख्यालय पर प्राप्त हो गया है।
-पूर्व मंत्री सुरेश राणा के प्रयास से हुए नए पुल स्वीकृत
शामली। पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा के प्रयास से गंदवेदा सगम में पूर्वी यमुना नहर का नया पुल स्वीकृत हुआ है। पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा का कहना है कि
गंदेवडा संगम छोटा हरिद्वार के रूप में विकसित हुआ है। हजारों की संख्या में यहां श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। पुल की चौड़ाई कम होने के कारण लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद से मिलकर दोनों पुलों को स्वीकृत करने का अनुरोध किया था।