शामली। कचरा प्रबंधन की दिशा में नगर पालिका द्वारा किया गया ट्रायल शत-प्रतिशत सफल रहा। नगर पालिका ने कचरा प्रबंधन के लिए शहर के सलेक विहार, गुलशन नगर, नाला पट्टी में सामुदायिक कम्यूनिटी कंपोस्टर और 12 घरों में होम कम्पोस्टर लगवाए थे, जिनके माध्यम से गीले कचरे से खाद तैयार कर लोेगों के घरों में लगाए गए पौधों पर प्रयोग किया गया, जिसका ट्रायल सफल रहा। ट्रायल सफल होने के बाद नगर पालिका और आईटीसी मिशन सुनहरा कल के पदाधिकारियों ने शहर में बड़े स्तर पर होम और सामुदायिक कम्पोस्टर लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। शहर के सभी 25 वार्डों में जहां सामुदायिक कम्युनिटी कम्पोस्टर लगवाए जाएंगे। वहीं, पेड़-पौधे, बागवानी, पार्क, किचन गार्डन वाले शहर के 500 ऐसे घर चिह्नित कर लिए गए हैं, जिनके अंदर होम कम्पोस्टर लगाए जाएंगे। होम कम्पोस्टर में बनने वाली जैविक खाद से घरों के अंदर पार्क, किचन गार्डन में लगाए गए पौधे हरे-भरे रहेंगे। ट्रायल का जायजा लेने के लिए बृहस्पतिवार को मिशन सुनहरा कल के सहारनपुर से आए कलस्टर मैनेजर मोसिन हसन और कलस्टर सुपरवाइजर सुनील कुमार ने लगाए गए कंम्पोस्टरों का जायजा लिया। जांच के बाद ट्रायल को सफल बताया। दोनों की करीब दो घंटे तक नगर पालिका चेयरमैन अरविंद संगल से भी इसको लेकर वार्ता हुई। नगर पालिका चेयरमैन ने बताया कि सभी 25 वार्डों में सामुदायिक कम्पोस्टर और 500 चिह्नित घरों में होम कम्पोस्टर लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इससे शहर के पार्क, किचन गार्डन और घर हरे भरे होंगे। साथ ही, कचरे का प्रबंधन होने से शहर भी साफ सुथरा नजर आएगा।
-इस तरह जैविक खाद की जाएगी तैयार
कलस्टर मैनेजर मोनिस हसन ने बताया कि दोनों कम्पोस्टर में गीला कचरा डालने के लिए तीन डिब्बे बने हुए होते हैं। इनमें पहले डिब्बे में गीला कचरा डालकर 35 दिन के लिए उसे बंद कर दिया जाता है। इसके बाद दूसरे डिब्बे में 35 दिन के लिए कचरा डालकर उसे भी बंद कर देते हैं। तीसरे डिब्बे में गीला कचरा डालने के जैसे ही 35 दिन पूरे होते हैं, पहले डिब्बे में जैविक खाद बनकर तैयार हो जाता है। इसे पेड़ पौधों या फिर सब्जियों में प्रयोग किया जा सकता है।
-सूखी पत्तियों की लेयर और सॉयल बेस्ड क्लचर से तैयार की जाती है जैविक खाद
कंपोस्टरों में सूखी पत्ती की 35 दिन के अंतराल में दो बार लेयर बिछाई जाती है ताकि पत्ती कचरे से निकलने वाले पानी को अच्छी तरह से सोख लें। इसके बाद सॉयल बेस्ड कल्चर का छिड़काव गीले कचरे पर किया जाता है, जिससे खाद बनना शुरू हो जाती है।
-सामुदायिक कमेटी करती है निगरानी
नगर पालिका चेयरमैन अरविंद संगल ने बताया कि सामुदायिक कम्यूनिटी कम्पोस्टर के लिए जिस मोहल्ले में इसे लगाया जाता है। वहां पर 11 लोगों की सामुदायिक कमेटी का गठन किया जाता है, जिनकी देखरेख में ही खाद तैयार की जाती है। उक्त लोग ही अपना गीला कचरा कंपोस्टर में डालने के प्रति जागरूक करते हैं । लोगों को साफ-सफाई के फायदें बताए जाते हैं। खाद बनने के बाद आधा खाद तैयार करने वाले कर्मचारी का होता है, जबकि बाकी खाद को लोगों को बांट दिया जाता है ताकि वह पौधों में उसे प्रयोग कर सकें।
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ट्रायल के दौरान पौधों में पाई गई अच्छी वृद्धि
नगर पालिका चेयरमैन और मिशन सुनहरा कल के पदाधिकारियों ने बताया कि देखने में आया कि ट्रायल के दौरान जिन लोगों ने तैयार जैविक खाद का प्रयोग किया था, उनके पौधों में अच्छी वृद्धि पाई गई। पौधों को संपूर्ण पोषक तत्व भी प्राप्त हुए। पौधों में रोग लगने की समस्या भी लोगों की खत्म हुई।