जनपद में हेपेटाइटिस की जांच न उपचार की सुविधा
शामली। जनपद के कई गांव हेपेटाइटिस सी की चपेट में है, लेकिन इस घातक बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नजर नहीं आता। जनपद में हेपेटाइटिस की न जांच की सुविधा है और न ही उपचार की सुविधा है। इसके चलते मरीज दूसरे शहरों में महंगा इलाज कराने को मजबूर है।
हेपेटाइटिस मूल रूप से लीवर की बीमारी है, जो वायरल संक्रमण से होती है। यह लीवर को नुकसान पहुंचाती है। जनपद में सरकारी अस्पताल में हेपेटाइटिस की जांच और उपचार की सुविधा नहीं है। डा. वेदभानू मलिक ने बताया कि हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) का शुरू में ही पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। यह तेजी से लीवर को नुकसान पहुंचाती है। हेपेटाइटिस बी को इलाज से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन खत्म नहीं होता। यह बीमारी धीरे-धीरे लीवर को नुकसान पहुंचाती है। इससे लीवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है। हेपेटाइटिस ए सामान्य प्रकार का पीलिया है। यह दूषित पानी और खाना खाने से होती है। उपचार के साथ साफ-सफाई और सही खानपान करने से तीन सप्ताह में ठीक हो जाता है। बचाव के लिए बच्चों को हेपेटाइटिस ए और बी का टीका लगाया जाता है।
कैराना क्षेत्र में पैर पसार रहा काला पीलिया
कैराना। हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) शुरू में साइलेंट रहती है। जब तक इस बीमारी के लक्षण आते हैं, तब तक यह बीमारी काफी फैल चुकी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि कैराना से बड़े नाले द्वारा पंजीठ तालाब में गंदा पानी जाता है। बाद में यह पानी मामौर झील में समा जाता है। गंदे पानी की समस्या का समाधान नहीं होने के कारण पंजीठ व आसपास का भूजल खराब हो चुका है। इसी वजह से पंजीठ के अलावा आसपास के कई गांवों में ग्रामीण हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) से पीड़ित है। पंजीठ के प्रधान इरशाद ने बताया कि उनके गांव में 30-40 ग्रामीण अभी भी हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) से पीड़ित हैं, जो विभिन्न शहरों के अस्पतालों में अपना उपचार करा रहे हैं। पिछले तीन साल में हेपेटाइटिस सी से कई लोगों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण पुष्कर सैनी ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले गांव में एनजीओ द्वारा कैंप लगाया गया था, जिसमें करीब 80 लोग काला पीलिया से संक्रमित मिले थे। इसके बाद से पीड़ित लोग अलग-अलग शहरों में अपना उपचार करा रहे हैं। सीएचसी कैराना के चिकित्साधीक्षक डा. अनिल कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस सी दूषित पानी और खाने से फैलता है। पहले भी गांव में कैंप लगा कर जांच की गई थी। कोरोना संकट खत्म होने के बाद फिर हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जाएगा।
- हेपेटाइटिस के लक्षण
आंखें और त्वचा पीली होना।
शरीर में थकान होना।
पेशाब का रंग गहरा होना।
जी मिचलाना, उल्टी होना पेट में सूजन और दर्द रहना।
भूख कम लगना, शरीर का वजन कम होना
-- हेपेटाइटिस होने के कारण
हेपेटाइटिस ए यह खाना और पानी के दूषित होने से आम तौर फैलता है।
हेपेटाइटिस बी- संक्रमित खून के चढ़ाने, संक्रमित सुई लगाने आदि से होता है।
हेपेटाइटिस सी- यह वायरस (एचसीवी) से होता है। यह संक्रमित खून और संक्रमित इंजेक्शन लगाने से होता है।
कोट
जनपद में हेपेटाइटिस सी की जांच और उपचार की सुविधा नहीं है। इस बीमारी से बचाव के लिए खान-पान में सावधानी बरतनी चाहिए और साफ-सफाई रखनी चाहिए। यह वायरस से फैलने वाली बीमारी है और लीवर को नुकसान पहुंचाती है।
-डा. संजय भटनागर, सीएमओ।