शामली में पलायन प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर कटाक्ष किया, तो भाजपाई भी मुखर हो गए। भाजपा विधायक सुरेश राणा ने आरोप लगाया कि सपा सरकार तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है, कैराना के सच को झूठे सत्यापन से दबाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री को यदि पलायन का सच देखना है, तो कैराना आएं। भाजपा विधायक सुरेश राणा से बातचीत के अंश :-
a भाजपा पर आरोप लग रहे हैं कि चुनाव नजदीक आने पर प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है?
प्रदेश का माहौल सपा सरकार बिगाड़ना चाहती है। व्यापारी की हत्या होती है, तो कोई नेता चिंता नहीं जताता, दूसरे वर्ग के व्यक्ति की मौत होने पर मुआवजा बांटने की होड़ लग जाती है। इससे प्रदेश सरकार की नीयत का पता चलता है।
a अब तक भाजपाई कहां सो रहे थे?
जब व्यापारियों की हत्या हुई, तब मुख्यमंत्री कहां सो रहे थे, हमने सदन में छह बार मामला उठाया, तब कहां गई थी प्रदेश सरकार। जब सरकार ने नहीं सुनी, तो भाजपा को आगे आकर जनता की आवाज उठानी पड़ी।
a आप सिर्फ हिंदुत्व की बात करते हैं?
प्रदेश के मुख्यमंत्री जब गोल टोपी लगाकर लोगों के सामने आते हैं, तो वह क्या संदेश देना चाहते हैं। क्या वह धर्म विशेष के ही मुख्यमंत्री है। सपा ध्रुवीकरण करना चाहती है, इससे ज्यादा सपा को कोई चिंता नहीं है। व्यापारी लुटता रहे, किसान बेहाल रहे, किसी को चिंता नहीं है।
a सीएम ने भाजपाइयों पर गुमराह करने का आरोप लगाया है?
गुमराह भाजपा नहीं कर रही, प्रदेश के मुख्यमंत्री कर रहे हैं। अपराधियों को पकड़ने के बावजूद हवालात से छुड़वा दिया जाता है। मथुरा के जवाहरबाग कांड के सूत्रधार रामवृक्ष यादव का सपा नेताओं से कनेक्शन था, उसे भी प्रदेश सरकार छिपाना और दबाना चाहती है। सपा गुंडों का संरक्षण कर रही है, जिसे जनता समझ चुकी है।
नफा नुकसान का गणित लगा रहे नेता...
शामली में पलायन का मुद्दा भाजपा ने उठाया, तो सियासी हलकों में हलचल मच गई। हर राजनीतिक दल अपने हिसाब से पलायन की परिभाषा तय कर रहा है। भाजपा इसे भुनाने में जुट गई है, तो सपा, बसपा और रालोद इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं। पलायन प्रकरण से आखिर किसका फायदा होगा और किसका होगा नुकसान। राजनीतिक दल भी इसकी गुणा भाग करने में लगे हुए हैं...
खास बात यह है कि मुद्दा भले ही कैराना से शुरू हुआ, मगर अब कांधला भी पहुंच गया। भाजपा सांसद ने कांधला की सूची जारी कर नई बहस छेड़ दी, जिसके बाद सपा नेता इसकी खिलाफत में उतर आए और कहने लगे कि भाजपा सांसद वोटों की राजनीति में क्षेत्र का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। क्या वास्तव में पलायन प्रकरण आगामी विधानसभा चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण करने में कामयाब होगा। क्योंकि शामली जिले की व्यवस्था पर गौर करें, तो यहां चुनावी समीकरण एकदम अलग रहा है।
जिले की कैराना, शामली और थानाभवन विधानसभा सीटों पर अलग ही समीकरण बनता है। ऐसे में हर राजनीतिक दल अपने जनाधार को बनाए रखने के प्रयास में है, तो भाजपा हिंदुओं को लामबंद कर सकती है। सीटवार अलग समीकरण हैं, जिसमें सपा गुर्जर और मुसलिम गठजोड़ को बनाकर रखना चाहती है। लब्बो लुआब यही है कि पलायन प्रकरण पर हर राजनीतिक दल की नजर लगी हुई है।