शामली में हुई बारिश के बाद सड़क पर भरे पानी में बंद हुई बाइक में धक्का लगाते बच्चे।
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शामली एक बार फिर 2013 में आई भयंकर बाढ़ जैसे हालात बनते जा रहे है। उस समय सात लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़े जाने यमुना पुल किनारे पानीपत-खटीमा टूटने के साथ हरियाणा पुलिस की चौकी बह गई थी। तटबंध टूटने के कारण दर्जनों गांवों की हजारों बीघा फसल बर्बाद हो गई थी। शनिवार को यमुना में छोड़े गए पांच लाख 39 हजार क्यूसेक पानी से फिर यही हालात बनते दिख रहे है।
पिछले कई दिनों से मैदानी क्षेत्रों और पहाड़ी क्षेत्रों में जमकर बारिश हो रही है। जिस कारण हथिनीकुंड बैराज पर पानी का दबाव बढ़ रहा है लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। शनिवार को यमुना में करीब साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़ा दिया गया। शुक्रवार को यमुना में छोड़े गए करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पानी के बाद यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर कूद गया, जाहिर है कि पांच लाख क्यूसेक पानी यमुना में आना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। 2013 में भी इसी तरह यमुना नदी में करीब सात लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया था। उस वक्त यमुना ने कैराना क्षेत्र में तबाही मचा दी थी। कैराना यमुना पुल की सड़क का हरियाणा की ओर का हिस्सा टूट गया था और हरियाणा पुलिस की चौकी ध्वस्त हो गई थी। इसके अलावा मामौर के पास यमुना तटबंध टूट गया था। जिसके बाद मवी, मामौर, डुडूखेड़ा, इस्सोपुरटील गांव जलमग्न हो गए थे।
ये गांव होंगे बाढ़ से प्रभावित
शामली जिले के गांव चौसाना, भड़ी, मुस्तफाबाद, नाई नगला, मंगलौरा, ऊदपुर, काला माजरा, बिडौली, चौतरा, कलरी बसेड़ा, जैनपुर, बल्हेडा, खुरगान, सकौती, डोकपुरा, मंसूरा,तिसंग, खोकरी, लक्ष्मीपुरा, मंड़ावर, रामड़ा, पठेड, मामौर, खुरगान, मवी, डुंडूखेड़ा, सहपत, गढ़ी रामकौर और इस्सोपुरटील।
अभी तक डूब चुकी है दो गांवों की फसल
यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के कारण नगलाराई के जंगल की सैकड़ों बीघा ज्वार, धान की फसल डूबने के साथ ही पानी अमरूद के बाग में घुस गया। इससे एक दिन पहले भी हैदरपुर की जमीन भी यमुना में समा गई थी। वही रविवार को यमुना के हालात और खराब होने की स्थिति में तटवर्ती गांवों के किसानों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन की लापरवाही, नही हुई तटबंध की मरम्मत
कई दिनों से हो रही बरसात के कारण यमुना तटबंध जगह जगह से टूट गया है। तटबंध में बारिश के कारण दरारें पड़ गई हैं। प्रशासन को पुरी जानकारी थी कि मानसून की बरसात के साथ ही यमुना में बाढ़ आ सकती है। इसके बावजूद भी प्रशासन ने यमुना तटबंध की और से आंखें की मूंद ली। हालात यह है कि अगर यमुना का पानी तटंबध के नजदीक पहुंचा तो भारी नुकसान हो सकता है। उधर प्रशासन ने यमुना की ठोकरों की और भी ध्यान नहीं दिया। जोकि आने वाले समय में हानिकारक हो सकता है।
प्रशासन पूरी तरह तैयार है, ग्रामीणों को अलर्ट किया जा रहा है, बाढ़ से निपटने के लिए तैयारी की गई है। - एसडीएम सुरजीत सिंह