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Shamli News: ये हैं लावारिस शवों के वारिस

Sat, 09 Sep 2023 12:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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लावारिश शवों का अंतिम संस्कार करने वाले शामली के सामाजिक कार्यकर्ता अजय संघल, संजीव और कपिल पाठ
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शामली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने लिए नहीं दूसरों के लिए जीते हैं। शहर के व्यापारी और सामाजिक कार्यकर्ता अजय संगल, संजीव कुमार और कपिल पाठक ने चार साल पहले लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की मुहिम शुरू की थी। इन तीनों की मुहिम में अब यह कारवां 25 लोगों की संख्या तक पहुंच गया। ये सभी जिलेभर में 158 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार अपने खर्च पर करा चुके हैं। खास बात यह है कि तीनों ने अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हुए हैं। इस मुहिम में इनको सम्मान भी मिल चुके हैं। तीनों का कहना है कि जब तक शरीर में जान है, लावारिश शवों के वारिस बनते हुए अंतिम संस्कार का नेक कार्य जारी रखेंगे।
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आर्य पुरी निवासी व्यापारी अजय संगल ने बताया कि पूर्व में शहर के सामाजिक कार्यकर्ता अजय पाठक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करते थे। बाद में उनकी हत्या हो गई। उन्होंने ही लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने की सीख दी। चार साल पूर्व अंतिम यात्रा सेवा ट्रस्ट का गठन किया, जिसमें संजीव कुमार और कपिल पाठक को जोड़ा गया। इनके अलावा ट्रस्ट में लोग जुड़ते गए और अब 25 लोगों का कारवां बन गया। जहां पर भी ट्रस्ट के सदस्यों को लावारिस शव होने की सूचना मिलती है। ट्रस्ट के सदस्य खुद के खर्च पर शहर के रेलवे फाटक पार श्मशान घाट में शवों का अंतिम संस्कार कराते हैं। चार साल में अब तक 158 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार खुद के खर्च पर करा चुके हैं। लोग भी अब ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों को लावारिस शवों के वारिस के नाम से पुकारने लगे हैं। उनके अनुसार अंतिम संस्कार के बाद मन को जो संतुष्टि मिलती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। जब तक शरीर में जान रहेगी, लावारिश शवों का अंतिम संस्कार किया जाता रहेगा। संवाद
एक शव के अंतिम संस्कार पर खर्च होते हैं सात हजार रुपये
सामाजिक कार्यकर्ता अजय संगल ने बताया कि एक शव के अंतिम संस्कार पर सात हजार रुपये का खर्च आता है। खर्च को ट्रस्ट के सदस्य आपस में मिलकर वहन करते हैंं। इसके अलावा विधि विधान से गंदेवड़ा संगम पर शवों की राख का विसर्जन किया जाता है। जबकि अस्थियों को परिजनों की सुपुर्दगी के लिए श्मशान घाट में ही रखवा दिया जाता है।
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पहचान कराने को लेते हैं सोशल मीडिया की मदद
अजय और संजीव कुमार ने बताया कि उनका प्रयास रहता है कि लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने से पहले तथा बाद में पहचान हो जाए। इसके लिए सोशल मीडिया पर शव के कपड़ों से लेकर शरीर पर बने निशान, लिखे नाम आदि को शेयर किया जाता है। अब तक 50 से अधिक शवों की पहचान कराने में भी अहम भूमिका निभाई है।

इनका भी मिल रहा पूरा सहयोग
व्यापारी अजय संंगल के अलावा संजीव कुमार, कपिल पाठक, व्यापारी मनोज कुमार, संरक्षक सत्यप्रकाश अग्रवाल का ट्रस्ट में मुख्य सहयोग है।
इन नंबरों पर दे सकते हैं सूचना

अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के लिए 9837118064 नंबर पर सूचना दी जा सकती है। सूचना पाते ही टीम मौके पर पहुंचकर अज्ञात शव के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करेगी।

जरूरतमंदों को शिक्षा दिलाने में भी अहम भूमिका निभा रहे
अजय संगल के अनुसारजरूरतमंदों को निशुल्क शिक्षा दिलाने में भी सभी सदस्य अहम भूमिका निभा रहे हैं। हर साल स्कूलों में निशुल्क पाठ्य सामग्री वितरण के अलावा बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाया जाता है।

अंतिम यात्रा सेवा ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कार्य सराहनीय है। अन्य लोगों को भी किसी न किसी तरह एक दूसरे की मदद के लिए आगे आना चाहिए। पदाधिकारियों का पुलिस को पूरा सहयोग मिल रहा है। - अभिषेक, एसपी शामली
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