झिंझाना। हजरत इमाम महमूद नासीरुद्दीन शहीद सब्जवारी के 858 वें उर्स के मौके पर ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। मुशायरे में शमा रोशन मौलाना फरीद ने की तथा मुशायरा का आगाज कैराना विधायक चौधरी नाहिद हसन ने फीता काट कर किया। शायरों ने लोगों को अपने कलाम से सुबह तक बांधे रखा।
शनिवार रात हुए मुशायरे में शायर नदीम फर्रुख ने कहा कि रोशनी का कुछ न कुछ इम्कान होना चाहिए, बंद कमरे में भी रोशनदान होना चाहिए। हिंदू मुस्लिम आपके माथे पर चाहे जो भी हो, आपके सीने में हिंदुस्तान होना चाहिए।
शायर शाइस्ता सना ने कहा कि किसी को गम ने किसी को खुशी ने मार दिया। जो बच गए तो उन्हें जिंदगी ने मार दिया। शायर दानिश कहा कि हर तरफ उसकी सूरत नजर आई है। जाने क्यों मुझ पे ये कैफियत छाई है। देखकर आप सब मुझको हैरान हैं क्यों। खुद गजल पेश करने गजल आई है। शायर वसीम राजू पुरी ने कहा कि अपनी औलाद को तालीम न देकर उनको उम्र भर के लिए कमजोर नहीं करना है। अपनी बीवी से करो प्यार वफाए, लेकिन अपने मां-बाप को इग्नोर नहीं करना है। शायर सज्जाद झंझट ने कहा कि इतना तरसाया है शादी की तमन्ना ने मुझे। अब तो हर शख्स मुझे अपना ससुर लगता है। शायर सलीम मिर्जा ने कहा कि कितनी हंसी थी रात अभी कल की बात है। हम तुम थे साथ-साथ अभी कल की बात है।
बिलाल सहारनपुरी ने कहा कि पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था। बाद में हिंदू मुसलमान हुआ करता था। जहाज देवबंदी ने कहा तमन्ना का प्याला भरा है फिफ्टी फिफ्टी। हुआ इश्क मेरा खरा फिफ्टी फिफ्टी। सुरापा का अत्बा है कोमा में कल से। मरा तो है, लेकिन फिफ्टी फिफ्टी। इसके अलावा जावेद इशाती, बिलाल सहारनपुरी, जावेद मुशीरी आदि शायरों ने भी मुशायरे में अपने कलाम पेश किए। दरगाह के सज्जादा नशी हाजी अमजद अली, सफदर अली तथा बाबर कुद्दूसी ने आए सभी मेहमानों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष नौशाद ठेकेदार, राकेश गोयल, खुर्शीद आलम, आशीष मित्तल, काजी शान मियां, विनोद संगल, अहमद अली, हम्ज़ा अली, नरेंद्र चिकारा, आस मोहम्मद, राव आफाक आदि मौजूद रहे। मुशायरा की अध्यक्षता मोहम्मद अली ने की और संचालन नदीम फारुख ने किया।