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Shamli News: अस्पतालों में डॉक्टर ही नहीं, कैसे स्वस्थ होंगे पशु

Sat, 25 May 2024 02:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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झिंझाना के राजकीय पशु चि​कित्सालय में लगा ताला
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शामली। जिले के पशु चिकित्सालयों का हाल बेहाल है। पशु चिकित्सक समय पर अस्पताल पहुंचना मुनासिब ही नहीं समझते। जिसके कारण फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वॉय ही पशुओं का उपचार कर रहे हैं। वहीं कुछ अस्पतालों को खोलकर कर्मचारी चले जाते हैं तो कुछ पर दिनभर ताला लटका रहता है। यही नहीं अधिकतर अस्पताल जर्जर अवस्था मेंं है और गंदगी का आलम है मगर विभागीय अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे। अमर उजाला की पड़ताल के दौरान कुछ इस तरह का नजारा देखने को मिला...
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स्थान- कुडाना का पशु चिकित्सालय
पशु अस्पताल में सुबह 11 बजे तक भी डाक्टर अनिल नहीं पहुंचे थे। मौके पर सहायक रोहित ही गाय का उपचार करते हुए मिले। अस्पताल में चारों ओर गंद थी। बिल्डिंग भी खस्ताहाल है। हैंडपंप भी खराब पड़ा है। ग्रामीण विनोद व आजाद का कहना है कि हम पशु लेकर जाते हैं मौके पर डाॅक्टर नहीं मिलते। ऐसे अस्पताल का क्या फायदा।
स्थान : बहावड़ी का पशु चिकित्सालय
यहां पर दोपहर एक बजे तक भी डाक्टर मीनल नहीं पहुंचे थे। सहायक दिनेश ही मिले। सहायक ने बताया कि डाक्टर साहब पर कई अस्पतालों का चार्ज है, पता नहीं आएंगे या नहीं। सप्ताह में कुछ दिन ही डाॅक्टर आते हैं।
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स्थान : गंगेरु का पशु चिकित्सालय
यहां पर कोई नहीं मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह एक व्यक्ति अस्पताल खोलकर चला जाता है, उसके बाद पूरा दिन कोई नहीं आता। ग्रामीण सलमान और यामीन का कहना है पशु चिकित्सक न होने से काफी परेशानी हो रही है। पशु बीमार होने पर कांधला जाना पड़ता है या फिर प्राइवेट डाक्टर को बुलाना पड़ता है।
स्थान: झिंझाना का पशु चिकित्सालय
कस्बे के बस स्टैंड स्थित अस्पताल में ताला लगा मिला। पशु पालक पशुओं को वापस ले जाते हुए मिले। भैंसवाल में भी कोई पशु चिकित्सक नहीं मिला। सहायक द्वारा ही दो पशुओं का इलाज किया। ऊन रोड स्थित चिकित्सालय में डाॅक्टर अजय कुमार मौजूद मिले। उन्होंने बताया कि उन पर पांच अस्पतालों का चार्ज है। इमरजेंसी होती है, वहीं जाते हैं।

स्थान : ऊन का राजकीय पशु चिकित्सालय
यहां पर कई वर्षों से डॉक्टर व फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल में सहायक ही पशुओं का इलाज कर रहे हैं। सहायक दवाइयां देते हुए मिला। डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति के लिए कई बार कस्बा वासी अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दे चुके हैं, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हो पाया है। पशुपालक सत्यब्रहम, नीरज, विकास, कंवरपाल ने बताया कि कीमती भैंस, गाय अगर गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो इस अस्पताल में इलाज की कोई सुविधा नहीं है।
स्थान: गढ़ीपुख्ता का पशु चिकित्सालय
कस्बे में स्थित पशु चिकित्सालय में कोई चिकित्सक नहीं मिला। कस्बेवासी रणकुमार तोमर, अजयगिरी, रॉकी चौधरी ने बताया कि चिकित्सालय में डाॅक्टर कभी-कभी आते हैं।। इससे पहले भी कई महीने कोई डाॅक्टर दिखाई नहीं दिया। पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सक न होने के कारण कस्बे के ग्रामीण अपने पशुओं को प्राइवेट डाक्टरों को दिखाने के लिए मजबूर रहते हैं।

स्थान-जलालाबाद का पशु चिकित्सालय
चिकित्सालय पर चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी तैनात मिला। उसने बताया कि चिकित्सालय पर कोई स्थायी चिकित्सक न होने के कारण पशुपालकों को अन्य स्थानों पर इलाज कराने जाने पड़ता है।
हर रोज 8 मामले आ रहे सामने
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि गर्मी के कारण अफारा, कब्ज के मामले पशुओं में बढ़े हैं। सात से आठ मामले सामने आ रहे हैं। पशुपालकों को भी पशुओं की देखभाल के टिप्स दिए गए हैँ।
पूरे जनपद में 27 राजकीय पशु चिकित्सालय है। इन सभी के लिए केवल आठ चिकित्सक उपलब्ध है। जिसके चलते एक डाॅक्टर पर कई-कई गांव का चार्ज है। वहीं गोशालाओं में भी जाना पड़ता है। गांव में टीकाकरण भी कराना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी के कारण परेशानी हो रही है। -डाक्टर चंद्रभानू कश्यप, मुख्य चिकित्साधिकारी
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