शामली। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि सूचना का अधिकार आम नागरिक का हथियार है। इसमें किसी वकील की आवश्यकता नहीं है। आम नागरिक खुद ही सादे कागज पर सूचना मांग सकता है। सूचना के अधिकार के तहत आने वाले प्रार्थना पत्रों के जवाब देने में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही होती है, तो कार्रवाई की जाएगी तथा लिपिक से लेकर अपीलीय अधिकारी तक दंड के भागीदार होंगे।
बुधवार को शामली कलक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने प्रथम अपीलीय अधिकारियों व जन सूचना अधिकारियों की कार्यशाला और समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि जिले के कुछ लिपिक व सूचना अधिकारियों की लापरवाही से आम नागरिकों को समय से सूचना नहीं मिल पाती है। एक माह में सूचना दे दी जानी चाहिए।
यदि भूलवश किसी दूसरे विभाग से संबंधित सूचना मांगने का प्रार्थना पत्र आ गया है, तो उसे तत्काल संबंधित विभाग के पास भिजवा दें।
उन्होंने कहा कि सूचना अधिकारी व अपीलीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी को समझें। अगर कोई सूचना अधिकारी सूचना देने में देरी कर रहा है, तो उसके संबंध में आयोग को अवगत कराएं। शिकायत कर्ता के साथ तृतीय पक्ष को सूचना का जवाब देना अनिवार्य है।
सूचना आयुुक्त ने कहा कि अपीलीय अधिकारी अपील को सुनेंगे। वादी प्रतिवादी को सुनने पर आदेश जारी करके आगामी 15 दिन में सभी पक्षों को अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि 30 दिन में सूचना नहीं देना अफसोसजनक है। सूचना मांगने के लिए जमा की जा रही धनराशि भी आयोग को भेजने में ढील हो रही है।
उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार का प्रयोग जनहित के कार्य में होना चाहिए। सूचना के अधिकार का दुरुपयोग करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। 500 से अधिक शब्दों की सूचना मांगने वाले शिकायत पत्रों को निरस्त कर दें तथा 20 साल की सूचना देना भी अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सूचना आयोग को अधिकारियों व जनता के सहयोग की आवश्यकता है।
कार्यशाला में परियोजना निदेशक ज्ञानेश्वर तिवारी, जिला विकास अधिकारी बलराम कुमार, कैराना के तहसीलदार राकेश त्यागी, तहसीलदार शामली अभयराज पांडे, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता शैलेंद्र गौतम, बीएसए चंद्रशेखर, कांधला बीडीओ और चकबंदी अधिकारी ने अपने विभाग से संबंधी सूचना देने के विषय पर राज्य सूचना आयुक्त से कुछ सवाल किए, जिन पर राज्य सूचना आयुक्त ने उन्हें जवाब देकर संतुष्ट किया।
इस मौके पर आयोजित बैठक में मुख्य रूप से शामिल होने वालों में डीएम इंद्र विक्रम सिंह, सीडीओ रेेनू तिवारी, अपर जिलाधिकारी केबी सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक जगदीश शर्मा, एसडीएम सदर सुुुुरजीत सिंह, एसडीएम कैराना दुष्यंत कुमार मौर्य, एसडीएम ऊन विनोद कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
वकीलों ने सूचना आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
शामली। जिला न्यायालय की स्थापना की मांग को लेकर जिले के अधिवक्ताओं ने छठे दिन उपनिबंधक कार्यालय में तालाबंदी करके क्रमिक भूख हड़ताल की। इस संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के सूचना आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। बुधवार को जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह के नेतृत्व में जिला मुख्यालय के अधिवक्ताओं ने कलम बंद हड़ताल रखते हुए उपनिबंधक कार्यालय की तालाबंदी करते हुए बेमियादी धरने पर बैठ गए।
सोमपाल सिंह चौहान, मुकेश कुमार, महेंद्र सैनी, ओमपाल सिंह, सतीश चौहान क्रमिक भूख हड़ताल पर रहे। इसके बाद अध्यक्ष के नेतृत्व अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलक्ट्रेट सभाकक्ष में प्रदेश के सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान से मिला। ज्ञापन देकर बताया कि 28 सितंबर 2011 को शामली जिले की स्थापना होने के बाद डीएम-एसपी की नियुक्ति कर दी गई थी।
मगर, जिला मुख्यालय पर जिला न्यायालय की स्थापना नहीं गई। कई बार भवन का प्रस्ताव बनाकर जिला बार एसोसिएशन की ओर से ओएसडी के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश एवं मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद को भेजा गया। इसके बावजूद जिला न्यायालय की स्थापना नही की गई है।
प्रतिनिधि मंडल में महासचिव नील कमल, कोषाध्यक्ष राजेश आर्यन, चंद्रवीर सिंह मलिक, सतीश चौहान, सतीश कुमार मिठालिया, चंद्रभान सिंह, सोराज सिंह, मुकेश गर्ग, रविंद्र कुमार, मनोज जागिड़, प्रवीण कुमार, जगदेव सिंह, दीपक कौशिक, रामफूल सिंह, सतपाल कश्यप, अमरदीप आर्य, सतेंद्र धिरयान, विवेक कुमार, अशोक कुमार, अरविंद जावला, राजकुमार, जसपाल राणा, रामकुमार वर्मा, जयपाल चौहान, विपिन सैनी, मणिकांत शर्मा, कृष्णदत्त शर्मा, राहुल वशिष्ठ, ओमपाल सिंह, प्रताप सिंह राठौर, धीर मलिक आदि रहे।
अप्रैल में वीडियो कान्फ्रेंसिंग से शिकायतों का निस्तारण होगा
शामली। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि सूचना देने में देरी से संबंधी सर्वाधिक शिकायतें विकास विभाग और पुुलिस की पहुंच रही हैं। आयोग द्वारा प्रदेश भर की करीब डेढ़ लाख शिकायतो का निस्तारण किया गया है, फिलहाल 45 हजार शिकायतें लंबित हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतों का निस्तारण अप्रैल माह में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कराया जाएगा।
बुधवार को शामली कलक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से वार्ता के दौरान राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि आरटीआई के नाम पर अधिकारियों को ब्लैकमेल नहीं होने दिया जाएगा, यदि कोई व्यक्ति ऐसा करेगा, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। सूचना मांगने वाले का उत्पीड़न भी बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बारे में व्यक्तिगत सूचना नहीं दी जाएंगी और सूचना का आवेदन ऑनलाइन स्वीकार नहीं होगा। आयोग को प्राप्त शिकायतों का निस्तारण अप्रैल माह में 5, 12, 19, 26 अप्रैल को वीडियो कांफ्रेंस के जरिये किया जाएगा। उसमें सहारनपुर समेत अन्य जिलो की शिकायतों पर सुनवाई होगी। इस मौके पर डीए ने सूचना आयोग के नियमों का पालन करने व नियम के तहत सूचना दिए जाने के निर्देश दिए। आयोग को भेजी गई शिकायतों और सूचना मांगने संबंधित लंबित मामलों पर बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में सुुनवाई होगी।