शामली। गांव लिलौन के लोग प्रदूषित पानी पीने के मजबूर हैं। गांव के पास से निकलने वाले गंदे नाले में फैक्ट्रियों का पानी आ रहा है। जिसका असर गांवों में लगे हैंडपंपों पर पड़ रहा है। हालात यह है कि नाले के करीब 200 मीटर के क्षेत्र में हैंडपंप गंदा पानी उगल रहे हैं। जिसे पीकर ग्रामीण और पशु बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीणों ने कई बार इस संबंध में आलाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
पूर्वी यमुना नहर में अधिक पानी आने पर निकासी के लिए नाला बनाया गया है। यह नाला गांव लिलौन से होता हुआ कृष्णा नदी में मिलता है। पिछले करीब पांच साल से नाले में नहर का पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इसका कारण नहर में अब अधिक पानी नहीं आता। नहर के पानी की जगह नाले में शहर के प्रदूषित पानी व फैक्ट्रियों से निकलने वाले पानी ने ले ली। लिहाजा यह नाला पूरी तरह से गंदा हो चुका है।
नाले के पानी की बदबू पूरे गांव में फैली रहती है। हालात यह है कि नाले के पास से निकलना भी दूभर है। अब इस नाले के पानी से भूगर्भ जल स्तर भी प्रदूषित होता जा रहा है। जिससे गांव में करीब 200 मीटर के क्षेत्र में लगे हैंडपंप पीला पानी उगल रहे हैं। इस पानी को पीकर लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। गंदे पानी के कारण गांव के मेघराज, दयानंद आदि की मौत हो चुकी है। इसके अलावा दर्जनों पशु भी प्रदूषित पानी पीने से बीमार होकर मर चुके हैं।
गांव लिलौन में हालात यह है कि यदि हैंडपंपों का पानी किसी बर्तन में रख दिया जाए, तो कुछ समय बाद ही वह पीला पड़ जाता है। बर्तन भी पूरी तरह से काला हो जाता है। ऐसे में लोगों को फिलहाल सबमर्सिबल के पानी का सहारा है। हालांकि वह भी खराब होता जा रहा है। गांव में लगे करीब 25 हैंडपंपों से गंदा पानी निकल रहा है।
डीएम से हुई शिकायत
पिछले दिनों गांव में चौपाल कार्यक्रम में पहुंचे डीएम ओपी वर्मा को ग्राम प्रधान अनिल कुमार व अन्य ग्रामीणों ने प्रदूषित पानी की समस्या बताई। ग्रामीणों ने बताया था कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी इस नाले में न डाला जाए। इसके लिए पाइप लगवाए जाएं, जो गांव की सीमा से बाहर जाकर नाले में गिरे। तभी इस समस्या का समाधान हो सकता है। जिस पर डीएम ने आश्वासन दिया था।