शामली। अपना घर आश्रम मेें लावारिस भर्ती हुआ व्यक्ति तीन माह बाद परिजनों से मिलकर भावुक हो गया। परिजन उसे अपने साथ ले गए।
अपना घर आश्रम में 20 अगस्त को लावारिस व्यक्ति को बलवा बाईपास से भर्ती कराया गया था। उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और शारीरिक रूप से भी बहुत कमजोर था। 10 अक्तूबर को उस व्यक्ति ने अपना नाम कलिका व गांव नगमा जमालपुर जिला शाहजहांपुर बताया। वहां के प्रधान का नंबर लेकर वीडियो कॉल पर बात कराई गई, लेकिन प्रधान ने उसे पहचाने से इंकार कर दिया। अगले दिन उसने जिला एटा बताया तो तो वहां बात की गई। कालिका बार-बार अपना जिला अलग-अलग बताता रहा, लेकिन गांव का नाम हर बार वही बताया।
20 नवंबर को कालिका की फिर से काउंसिलिंग की गई, आश्रम कार्यालय के लगातार प्रयास से कलिका के सही गांव का नाम नौगवां पता चला, लेकिन वर्तमान में वह अपने मामा के यहां गांव पुरवा पिपरिया जिला हरदोई में रहने की जानकारी हुई। 22 नवंबर को वहां के ग्राम प्रधान ने कलिका के ममेरे भाइयों से बात कराई। इसके बाद परिजन आश्रम पहुंचे और कलिका को अपने साथ ले गए।