शामली। केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण लागू ना होने पर आहत अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ अभियान चलाएगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट संकल्प रैलियां की जाएंगी, जिसमें भाजपा हराओ का नारा बुलंद किया जाएगा।
सोमवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने पदाधिकारियों के साथ शामली नगरपालिका परिषद में मीटिंग की। प्रेसवार्ता में यशपाल मलिक ने बताया कि केंद्रीय सेवाओं में जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए 10 साल से आंदोलन चल रहा है। 2014 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने आरक्षण दिया, लेकिन 15 मार्च 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था।
इसके बाद 26 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जाट समाज के प्रतिनिधियों से वार्ता कर आश्वस्त किया था कि जाट समाज को कानूनी रुप से आरक्षण दिलाया जाएगा, लेकिन वह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ।
जाट समाज से हुई वादा खिलाफी को लेकर ही आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर जाटों को एकजुट होकर निर्णय लेना होगा। इसी उद्देश्य से जाट संकल्प रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। रैलियों में तय किया जाएगा कि आरक्षण लागू नहीं होता है, तो विधानसभा चुनाव पर जाट समाज का राजनैतिक निर्णय क्या होगा। जाट संकल्प रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में भ्रमण किया जाएगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 125 विधानसभा सीटों पर जाट आरक्षण समिति के प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। इनकी जिम्मेदारी होगी कि जाट समाज को जागरूक करने में सबको एकजुट करेंगे।
इस कार्य में खाप पंचायतों का सहयोग भी लिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जाटों का उद्देश्य भाजपा का हराना है। हम किसी एक पार्टी का समर्थन नहीं करेंगे, बल्कि हर सीट पर भाजपा प्रत्याशी को हराने वाले प्रत्याशी को समर्थन किया जाएगा। इस दौरान संघर्ष समिति के शामली जिलाध्यक्ष सतेंद्र चिकारा, राष्ट्रीय महासचिव बीएस अहलावत, डॉ. आरएस तोमर, सतेंद्र फौजी, पंकज ढिंढाली, सरविन ढिंढाली, अनिल मलिक, सचिन खेड़ी, दुष्यंत बनत आदि मौजूद रहे।