आवेदकों के साक्षात्कार लेती सीडीओ रेनू तिवारी।
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शामली। एक तो शिक्षा का गिरता स्तर ऊपर से बेरोजगारी की मार। कृषि विषय की मास्टर डिग्री हासिल कर ली, लेकिन अंग्रेजी में एग्रीकल्चर तक लिखना नहीं आया। प्रशिक्षित कृषि उद्यमी स्वावलंबन योजना के तहत खाद(पेस्टीसाइड) की दुकानों के लाइसेंस आवंटन के लिए साक्षात्कार लिए गए, तो यही हाल देखने को मिला।
दरअसल इस योजना के तहत जिले के पांचों ब्लाक में खाद एवं पेस्टीसाइड की पांच दुकानों के लाइसेंस का आवंटन होना है। योजना में करीब साढ़े तीन लाख रुपये का ऋण चयनित आवेदक को मिलना है। इस ऋण की अदायगी पर तीन साल तक ब्याज का भुगतान प्रदेश सरकार करेगी। सरकार ने लुभावनी योजना लागू की, तो उसका लाभ लेने के लिए लोग आतुर हो गए। इसी के चलते योजना में प्रतिभाग करने के लिए 23 युवाओं ने आवेदन किए। शुक्रवार को शामली कलक्ट्रेट में मुख्य विकास अधिकारी/प्रभारी जिलाधिकारी रेनू तिवारी की अध्यक्षता में आवेदकों के साक्षात्कार लिए गए। आवेदन करने वालों में से 21 ने साक्षात्कार में हिस्सा लिया। इस दौरान उपनिदेशक कृषि डॉ. शिवकुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर, लीड बैंक मैनेजर शैलेश कुमार, जिला सहकारी बैंक के सचिव समयवीर सिंह तथा परियोजना निदेशक (डीआरडीए) ज्ञानेश्वर तिवारी ने साक्षात्कार लिए। मुख्य विकास अधिकारी रेनू तिवारी ने बताया कि योजना के तहत खाद, पेस्टीसाइड की दुकानों के लाइसेंस आवंटन के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। साक्षात्कार समिति की संस्तुति के बाद चयनित आवेदकों को सूचना भेजी जाएगी।
अंग्रेजी में एग्रीकल्चर लिखना पढ़ा भारी
साक्षात्कार के लिए अधिकांश आवेदक कृषि विषय में बीएससी अथवा एमएससी वाले पहुंचे। उनमें कुछ ऐसे रहे, जो पूर्व में पेस्टीसाइड कंपनी में नौकरी कर चुके हैं। खास बात यह रही कि कई आवेदकों से जब भूमि, पीएच मान, अम्लीय और क्षारीय के अलावा फसल चक्र के बारे में पूछा गया, तो वह ठीक से जवाब तक नहीं दे सके। इतना ही नहीं, दो आवेदक तो ऐसे भी रहे, जो अंग्रेजी में एग्रीकल्चर तक नहीं लिख पाए।
हर आवेदक ने बताई बेरोजगारी की समस्या
खाद की दुकान के आवंटन के लिए साक्षात्कार देने पहुंचे अधिकांश आवेदकों से जब पूछा गया कि तुम दुकान क्यों खोलना चाहते हो, तो सभी का यही जवाब था कि बेरोजगार हैं, परिवार पालने के लिए कुछ काम तो करना पड़ेगा। उनमें अधिकांश आवेदक 30 साल ज्यादा से उम्र वाले थे। कुछ आवेदकों ने यह भी बताया कि कृषि विषय में पढ़ाई करने के बावजूद वह फिलहाल वह खेती करके ही जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन खेती से उतना भला नहीं हो पा रहा है।