शामली। उपनिरीक्षक सहजोर मलिक के पैतृक गांव लिसाढ़ में शनिवार को उनको नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। नौ वर्षीय बेटे वंश मलिक ने उन्हें मुखाग्नि दी। उधर, पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही राजनीतिज्ञों नेपीड़ित परिवार के घर पहुंचकर घटना पर दुख जताया।
गांव लिसाढ़ निवासी दरयाव सिंह के बेटे सहजोर मलिक यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक थे। काफी समय से वह बिजनौर में तैनात थे और मंडावर थाना क्षेत्र के बालावाली चौकी प्रभारी थे।
शुक्रवार रात बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी। पोस्टमार्टम होने के बाद उनका पार्थिव शरीर लेकर बिजनौर से पुलिसकर्मी शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे लिसाढ गांव पहुंचे, तो परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। इसके बाद. मलिक के अंतिम यात्रा में काफी लोग शामिल रहे।
श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटा वंश मलिक ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान एसडीएम शामली सुरजीत सिंह, सीओ सिटी अशोक कुमार सिंह, थाना प्रभारी अवनीश गौतम ने भी नम आंखों से उपनिरीक्षक सहजोर मलिक को अंतिम विदाई दी।
वहीं, जिला पंचायत अध्यक्ष पति के प्रसन्न चौधरी, पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता पंकज मलिक, गठवाला खाप से राजेंद्र सिंह मलिक, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बिजेंद्र कुमार किवाना सहित आसपास के गांवों के प्रधान और अन्य लोगों ने पीड़ित परिवार के यहां पहुंचकर घटना पर दुख प्रकट किया।
सिपाही भर्ती होने के बाद 2001 में बने थे उपनिरीक्षक
शामली। सहजोर मलिक 1191 में पीएसी में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। इसके बाद वह यूपी पुलिस में आने के बाद 2001 में उपनिरीक्षक बन गए थे। 10 साल पूर्व उन्होंने मेरठ में मकान बना लिया था। मेरठ में ही उनका परिवार रहता है।