शामली, झिंझाना। वर्ष 2019 में शासन की महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत कस्बे में एमआरएफ सेंटर के लगाने की शुरुआत हुई थी। जो काफी समय पहले तैयार भी हो चुका है। 33.67 लाख की लागत से स्थापित कूड़ा प्रथक्करण सेंटर अब भी अपने चलने के इंतजार में है। लापरवाही के कारण अब वह भी कूड़े में तब्दील हो चुका है।
वर्ष 2019 में कूड़ा के निपटारे के लिए निर्माण हेतु शासन स्तर पर 33.67 लाख रुपया स्वीकृत हुआ था। कस्बे के निकट हसनपुर मार्ग पर नाला पटरी के समीप एमआरएफ सेंटर का निर्माण शुरू हुआ था। वर्ष 2022 में प्रोजेक्ट पूरा हो गया था। संचालन के लिए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया तो ऊर्जा निगम ने लगभग 8.50 लाख का एस्टीमेट बनाकर नगर पंचायत को थमा दिया था।
समझौते पर एस्टीमेट जमा करने पर कुछ माह पहले कनेक्शन चालू हो गया, लेकिन कूड़ा निस्तारण का यह एमआरएफ सेंटर अभी तक शुरू नहीं हो पाया। प्लांट के अंदर कूड़ा हो गया है, अंदर घास उगी हुई हैं। खुले में रखी गई लाखों रुपये की मशीन धूप और बरसात झेल कर कूड़ा होने के कगार पर हैं। पांच वर्षों से लंबित पड़ा पूरा प्रोजेक्ट और खुले में स्थापित ट्रोमन मशीन जंग खा चुकी है। नगर पंचायत द्वारा स्थापित प्लांट पर ट्रोमन मशीन के द्वारा कूड़े से प्लास्टिक और ठोस पदार्थ को अलग-अलग किया जाना था। जिससे कचरे से निकाली गई प्लास्टिक और कचरे से निर्मित खाद को किसानों को बेचकर नगर पंचायत की इनकम बढ़ाई जानी थी।
अधिशासी अधिकारी समीर कश्यप ने बताया कि बिजली का ट्रांसफार्मर लग चुका है, अभी लाइन का एक तार और डलना शेष है। बिजली की समस्या समाप्त होते ही प्लांट चालू करा दिया जाएगा।