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Shamli News: जिस दर्द को शेर में लिखा, उसी दर्द का दंश झेल रहा परिवार

Sat, 19 Sep 2026 01:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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कैराना के मशहूर शायर मुजफ्फर रज्मी पाकिस्तान में कार्यक्रम के दौरान। फाइल फोटो
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कैराना (शामली)। परिंदे भी नहीं रहते पराये आशियानों में, हमने उम्र गुजार दी किराये के मकानों में... मशहूर शायर मुजफ्फर रज्मी के इस शेर में जो दर्द था, वहीं दर्द उनके परिवार की जिंदगी में आज भी कायम है। देश-विदेश में अपनी शायरी का लोहा मनवाने वाले कैराना निवासी रज्मी को खुद का आशियाना नसीब नहीं हुआ। उनके इंतकाल के 14 साल बाद भी उनके तीन बेटे नगर पालिका के उसी किराये के मकान में रहने के लिए मजबूर हैं, जहां रज्मी ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुजारा।
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कैराना में पांच जून 1935 को जन्मे मुजफ्फर रज्मी नगर पालिका में लिपिक के पद पर कार्यरत थे। नौकरी के दौरान ही उनकी शायरी देश-विदेश में पहचान बनाने लगी। वह चार बार सऊदी अरब और एक-एक बार बहरीन, पाकिस्तान व दुबई गए। 25 सितंबर 2012 को केंद्र सरकार के प्रयास से उन्हें अमेरिका जाना था, लेकिन इससे पहले ही 19 नवंबर 2012 को उनका इंतकाल हो गया।
रज्मी के बेटे जावेद इकबाल, परवेज जमाल और नवेद कमाल आज भी मोहल्ला बेगमपुरा स्थित नगर पालिका के उसी मकान में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं जो उनके पिता को मिला हुआ था। जावेद इकबाल ने बताया कि लॉकडाउन से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मकान की समस्या को लेकर पत्र भेजा था और रज्मी की गजलों की प्रतियां भी भेजी थीं। वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी पत्र दिया गया। वहां से जिला प्रशासन और डूडा को निर्देश दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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संसद में भी गूंजा रज्मी का शेर
मुजफ्फर रज्मी का शेर ‘यह जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने, लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई’ कई बार संसद में गूंज चुका है। सुषमा स्वराज के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, इंद्र कुमार गुजराल और वीपी सिंह भी इसे संसद में पढ़ चुके हैं। 29 जुलाई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में रज्मी का यह शेर सुनाया था।
1972 में मिला था पालिका का मकान
जावेद इकबाल ने बताया कि वर्ष 1972 में नगर पालिका ने उनके वालिद को मकान किराये पर दिया था। 1995 में रज्मी के सेवानिवृत्त होने के बाद 2002 में मकान खाली कराने का प्रयास किया गया। इसके बाद एसडीएम न्यायालय में मुकदमा चला। जावेद के अनुसार 2011 में एसडीएम न्यायालय ने उन्हें किरायेदार माना था। परिवार को मकान बचाने के लिए अब भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। रज्मी की 14वीं बरसी पर शनिवार को मदरसे में कुरानख्वानी कराई जाएगी।

कैराना के मशहूर शायर मुजफ्फर रज्मी पाकिस्तान में कार्यक्रम के दौरान। फाइल फोटो

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