लाशों को ठिकाने लगाने का स्थान बना जिला
शामली। अपराधियों द्वारा हत्या करने के बाद शवों को ठिकाने लगाने के लिए जिला सुरक्षित ठिकाना बनता दिख रहा है। झिंझाना क्षेत्र में मिले दो युवकों के शवों की तीन दिन बाद भी पहचान नहीं हो पाई है। उधर, कैराना क्षेत्र में मिले दो युवतियों के शवों की 13 माह बाद भी पहचान नहीं हो पाई।
झिंझाना थानाक्षेत्र के गांव अलीनगर के निकट काठा नदी में युवक का मिट्टी में दबा हुआ शव बरामद हुआ था। इसी दिन गांव सिकंदरपुर के जंगल में ईंख के खेत में युवक का शव मिला था। दोनों की हत्या कर शवों को यहां छिपाने की कोशिश की गई है। उधर, कैराना क्षेत्र के गांव जगनपुर के जंगल में पिछले साल 20 मई 2020 को दो युवतियों के शव बरामद हुए थे, जिनकी धारदार हथियार से हत्या की गई थी। पुलिस 13 माह बीतने के बाद भी शवों की पहचान कराने में सफल नहीं हो पाई। पुलिस ने आसपास के राज्यों के अलावा नेपाल बॉर्डर तक युवतियों की पहचान के लिए फोटो चस्पा किए, लेकिन पहचान नहीं हो सकी।
कैराना क्षेत्र में एक मकान में खून के धब्बे मिलने पर शामली व मेरठ की फोरेंसिक टीम ने पहुंचकर नमूने लिए थे, जिनकी रिपोर्ट आज तक नहीं आई। उस मकान में रहने वाले व्यक्ति को भी पुलिस तलाश नहीं कर पाई। युवतियों की शनाख्त न होने से उनकी हत्या का राज आज तक नहीं खुल पाया। एसपी सुकीर्ति माधव का कहना है कि शवों की पहचान के लिए पुलिस की सभी स्तर पर कार्रवाई चल रही है।