संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने उपभोक्ता को विद्युत विभाग द्वारा गलत बिल भेजने, ठीक न करने के मामले की सुनवाई की। आयोग ने इस मामले में विभाग के अधिशासी अभियंता पर 35 हजार रुपये जुर्माना लगाने का आदेश सुनाया है।
शहर के मोहल्ला रेलपार निवासी सरवेंद्र ने आयोग में 15 नवंबर 2019 को विद्युत वितरण खंड द्वितीय शामली के अधिशासी अभियंता के विरुद्ध परिवाद दायर कराया था। परिवादी का कहना है कि करीब 20 साल से दो किलोवाट का विद्युत कनेक्शन स्वीकृत है, जिसका बिल नियमानुसार अदा करता रहा है। वर्ष 2018 में मीटर खराब होने पर उसकी शिकायत पर विभाग ने 12 जनवरी 2019 को मीटर उतारा और उसी दिन विभागीय कर्मचारी ने सीलिंग प्रमाण पत्र दिया था। इसमें अंतिम बिल की रीडिंग 5440 थी। इसका भुगतान 28 मार्च 2019 को 9039 रुपये बिल अदा कर रसीद प्राप्त कर ली।
विपक्षी ने 13 सितंबर 2019 को 24793 रुपये का गलत बिल भेज दिया, जबकि इससे पूर्व 12 जून 2019 को मीटर रीडिंग 151 दी गई, जिसका बिल 1137 रुपये 83 पैसे का मैसेज भेजा गया। इसके बाद 11 जुलाई 2019 को मीटर रीडिंग 188 दी गई, जिसका बिल 22790 रुपये 68 पैसे भेजा गया। बिल को ठीक कराने के लिए परिवादी कई बार विभाग में बिजलीघर पर गया, लेकिन बिल ठीक नहीं किया गया।
परिवादी का कहना है कि बिल को ठीक कराने के लिए कई बार विभाग में गया, लेकिन बिल ठीक नहीं किया गया। इसके चलते वह 2019 के बाद से अब तक बिल जमा नहीं करवा पाया। आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने मामले में सुनवाई करने के बाद जारी किए आदेश में कहा कि परिवादी अपने वाद को सिद्ध करने में सफल रहा। विपक्षी विवादित धनराशि प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। विपक्षी को आदेशित किया गया कि वह परिवाद व्यय के दस हजार रुपये और सेवा में कमी के लिए 25 हजार रुपये का अर्थदंड अदा करे।