शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने बीमा कंपनी द्वारा मेडिक्लेम न देने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने बीमा कंपनी पर 2,13,952 रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है।
शहर के हॉस्पिटल रोड निवासी योगेश बिंदल ने आयोग में 13 फरवरी 2019 को द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बुढ़ाना रोड शामली और पंजाब नेशनल बैंक शाखा मंडी मार्शगंज शामली के प्रबंधक के विरुद्ध आयोग में परिवाद दायर कराया।
परिवादी ने बताया कि बीमा कंपनी से उसने अपना और अपनी पत्नी के लिए मेडिक्लेम पॉलिसी पीएनबी ओरिएंटल रॉयल मेडिक्लेम वर्ष 2016 में ली थी। उस समय उन्हें विश्वास दिलाया गया था कि इलाज पर पांच लाख रुपये तक खर्च का भुगतान किया जाएगा। परिवादी ने प्रीमियम राशि 6760 रुपये का भुगतान किया।
पॉलिसी लेते समय दोनों पति पत्नी स्वस्थ थे। बीमा पॉलिसी का रिनुअल पांच जनवरी 2017 को और पांच जनवरी 2018 को हुआ। वर्ष 2018 में पाॅलिसी लेने के कुछ समय बाद परिवादी को घुटन, बेचैनी, सांस फूलने और ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या होने पर उसने नई दिल्ली अस्पताल में दिखाया, जहां उनकी हार्ट की नसों में ब्लाॅकेज बताते हुए स्टंट डालने के लिए एडवाइस किया गया।
इसके संबंध में परिवादी ने विपक्षी बीमा कंपनी के टीपीए रक्षा हेल्थ इंश्योरेंस से संपर्क किया ओर कैशलेस फैसिलिटी के लिए आवेदन किया, लेकिन उन्हें कैशलेस सुविधा नहीं दी गई, जिस कारण परिवादी ने अपना इलाज स्वयं कराया। इलाज में तीन लाख रुपये खर्च हुआ, जिसमें सभी बिल बीमा कंपनी को उपलब्ध कराए गए, लेकिन उन्हें कोई भुगतान नहीं किया और क्लेम रिजेक्ट कर दिया जबकि परिवादी को बीमा कंपनी या उसके टीपीए द्वारा अधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी गई।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने दिए निर्णय में विपक्षी बीमा कंपनी को आदेशित किया कि वह बीमा क्लेम में वर्णित धनराशि 1,53,952 रुपये मय छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज, क्लेम निरस्तीकरण की तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक और परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए इस आयोग में जमा करें।
साथ ही बीमा कंपनी पर सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार करने के लिए 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को न देकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।