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Shamli News: आयोग ने चीफ पोस्ट मास्टर लखनऊ पर लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना

Thu, 24 Sep 2026 01:27 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने सीआईएसएफ के कांस्टेबल की भारतीय डाक जीवन बीमा निगम की पॉलिसी की किस्त जमा न करने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने चीफ पोस्ट मास्टर को 50 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है।
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गांव बहावड़ी निवासी अमरपाल ने आयोग में चीफ पोस्ट मास्टर जनरल यूपी सर्किल उप्र परिमंडल लखनऊ के विरुद्ध दायर परिवाद में बताया कि वर्ष 2007 में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में कांस्टेबल के पद पर नागपुर एयरपोर्ट में तैनात थे। उनके पास डिप्टी कमांडेंट सीआईएसएफ यूनिट नागपुर कार्यालय में भारतीय डाक जीवन बीमा निगम नागपुर के कर्मचारी आए और उन्हें डब्लयूएलए/60 वर्ष तक के लिए 30 लाख रुपये की पाॅलिसी प्रतिमाह 525 रुपये की किस्त पर 20 लाख रुपये मिलने के लाभ बताए। इस पर उसने दो पॉलिसी ली थी।
वर्ष 2011 में उनका ट्रांसफर नागपुर से उत्तर प्रदेश हो गया। जिस पर दोनों बीमा पॉलिसी को चीफ पोस्ट मास्टर जनरल उत्तर प्रदेश परिमंडल लखनऊ को ट्रांसफर कर दी गई। उन्होंने दोनों बीमा पॉलिसियों डब्लयूएलए/60 से ईए/45 में कन्वर्ट करने के लिए परिमंडल लखनऊ में आवेदन किया। इसके बाद मूल बांड पर नया प्रीमियम तय करके 2722 रुपये प्रतिमाह लिखा गया और अंतिम प्रीमियम तिथि अगस्त 2024 दी गई। वह फरवरी 2016 तक नजदीकी डाकघर में किस्त जमा करते रहे।
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परिवादी का कहना है कि मार्च 2016 में वह पॉलिसी की किस्त जमा करने के लिए गया तो दोनों पॉलिसियों को पहले ऑनलाइन कराने को कहा। जब उन्होंने पॉलिसी ऑनलाइन कराई तो पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों ने बताया कि उनकी पॉलिसी ईए/45 में कन्वर्ट नहीं हुई और अभी भी पाॅलिसी डब्लयूएलए/60 में ही है। इसके बाद प्रीमियम ऑफलाइन या ऑनलाइन जमा नहीं किया गया और न ही पॉलिसी माइग्रेट की गई।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने विपक्षी चीफ पोस्ट मास्टर जनरल यूपी सर्किल उप्र परिमंडल लखनऊ को आदेशित किया कि वह दोनों पॉलिसी की परिपक्वता तिथि पर देय धनराशि में से समस्त बची हुई किस्तों की धनराशि को समायोजित कर शेष धनराशि को परिपक्वता अवधि से अंतिम भुगतान की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में जमा करें। साथ ही विपक्षी पर अनुचित व्यापार व्यवहार एवं सेवा में कमी के लिए 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया।
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