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पैसे से ज्यादा सेवाभाव का बनाया जीवन का आधार

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शामली में डॉक्टर्स डे पर परिचर्चा फोटो डॉक्टर विपिन कौशिक - फोटो : SHAMLI
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शामली। चिकित्सा के क्षेत्र को कुछ चिकित्सक व्यवसाय के रूप में देखते हैं, वहीं आज भी समाज में ऐसे चिकित्सकों की कमी नहीं है, जो मरीजों का उपचार करने के साथ इंसानियत का दायित्व निभा रहे हैं। ऐसे चिकित्सक सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। ऐसे चिकित्सक निशुल्क कैंप लगाकर मरीजों को निशुल्क उपचार व दवा देने के साथ ही गरीब लोगों को जरूरत का सामान भी उपलब्ध कराते हैं। ऐसे चिकित्सक समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं और दिनरात लोगों के बीच रहकर समाजसेवा करने में जुटे हैं। पेश है एक रिपोर्ट...
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16 साल से समाजसेवा में जुटे डॉक्टर दंपति
शहर में मां सावित्री हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सक डॉ. रीतिनाथ शुक्ला और डॉ. नीलम करीब 16 साल से समाजसेवा के कार्यों में जुटे है। उन्होंने बताया कि अब तक वे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में 500 से ज्यादा निशुल्क कैंप लगाकर मरीजों का उपचार कर चुके हैं। शहर में आपातकालीन स्थिति होने पर मौके पर पहुंचकर लोगों को उपचार देते हैं। अस्पताल में प्रत्येक माह की पहली तारीख को पहले 30 अल्ट्रासाउंड की सुविधा फ्री और जरूरतमंद गरीबों को हॉस्पिटल में ओपीडी और दवा निशुल्क देते हैं। इस साल जनवरी माह में गांव रामगढ़ को गोद लेकर वहां से वाशिंदों का फ्री इलाज करने का संकल्प लिया है। अब तक करीब 1500 मरीजों का फ्री उपचार कर चुके हैं। कोरोना काल में जरूरतमंदों को 1800 से ज्यादा राशन किट का वितरण किया। रोटरी और इनरव्हील क्लब से जुड़कर भी समाज सेवा के कार्य में जुटे रहते हैं।
कैंप लगाकर मरीजों की करते है सेवा
शहर के बड़ा बाजार मुरारी वाला कुआं निवासी डॉ. विपिन कौशिक निशुल्क कैंप लगाकर मरीजों का निशुल्क उपचार व दवा देकर सामाजिक दायित्व निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर साल 27 व 28 मई को दो दिन तक अपने क्लीनिक पर आने वाले सभी मरीजों को निशुल्क परामर्श व दवा देते हैं। इन दो दिन में मरीजों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता। इसके अलावा मां शाकंभरी देवी पर हर साल दशहरा के बाद असोज के महीने में एकादशी से लेकर चतुर्दशी तक निशुल्क कैंप लगाकर मरीजों की सेवा करते है। यह कार्य सालों से नियमित रूप से चल रहा है। क्लीनिक पर आने वाले गरीब मरीजों को भी निशुल्क दवा देकर मदद करते हैं। सेवाभाव की यह प्रेरणा पिता स्वर्गीय नत्थुराम वैद्य से मिली है। उनके पिता गरीब मरीजों को दवा देने के साथ आने जाने का किराया और फल खाने तक के पैसे दे देते थे। वे भी अपने पिता की दिखाई इंसानियत की राह पर चलने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि गरीबों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
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