जलालाबाद। हसनपुर लुहारी गांव में इंद्रगढ़ माजरा मार्ग पर स्थित प्राचीन सिद्ध शिव मंदिर के अतीत के बारे में सटीक जानकारी तो किसी के पास नहीं है, लेकिन पुराने लोग कहते हैं कि इस प्राचीन सिद्ध शिव मंदिर मंदिर का निर्माण महाभारत काल के दौर में हुआ था। साथ ही यह भी मान्यता है कि इस मंदिर में जो शिवलिंग स्थापित है, ये शिवलिंग पूरे देश में सिर्फ पांच जगहोें पर स्थित है।
गांव इंद्रगढ़ माजरा के बीच जंगल में स्थित प्राचीन शिव मंदिर के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा है। कहते हैं इस मंदिर में जो भक्त सच्चे मन से सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा व शिवलिंग पर जलाभिषेक करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मंदिर महाभारतकालीन होने के कारण इसकी भीतरी दीवारों पर कई धार्मिक आकृतियां हैं। लोग कहते हैं कि इस तरह की आकृतियां महाभारत काल के दौरान मंदिर या अन्य पवित्र स्थलों पर बनाई जाती थी। मंदिर की दीवारों की चिनाई में चूना व मिट्टी का इस्तेमाल किया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि करीब पांच सो साल पहले बाढ़ आने के कारण गांव नष्ट हो गया था और सिर्फ मंदिर ही अपनी जगह पर शेष बचा था। मंदिर के आसपास जब भी खोदाई होती है तो यहां भिन्न भिन्न प्रकार की घरेलू सामग्री निकलती है।करीब सो साल पहले तक मंदिर जीर्णशीर्ण हालत में पड़ा हुआ था। इसके बाद धीरे धीरे लोगों ने यहां आकर साफ सफाई ओर मरम्मत का कार्य करना शुरु किया।
देश में ऐसे सिर्फ पांच शिवलिंग
मंदिर की देखभाल करने वालों में शामिल अंग्रेज कुमार ने बताया कि मंदिर की शिवलिंग का आकार सामान्य शिवलिंग से अलग है। ऐसे शिवलिंग देश के सिर्फ पांच मंदिरों में हैं। इनमें एक मंदिर बागपत का प्रतिष्ठित पुरा महादेव मंदिर शिवलिंग व तीन ऐसे शिवलिंग साऊथ के मंदिरों में हैं।
मंदिर कितने साल पुराना है। यह जानकारी किसी के पास भी सटीक नहीं है। सिर्फ आकृतियों व अन्य संकेतों से अंदाजा लगाया जा रहा है। हालांकि मंदिर प्राचीन है।सूरज चंद
जब प्रलय आई तब पूरा गांव बर्बाद हो गया था। सिर्फ भगवान शिव मंदिर ही बचा बचा था। जो शिवलिंग यहां है ऐसे शिवलिंग पूरे देश के सिर्फ पांच मंदिरों में हैं।अनुज सैनी
यह एक सिद्ध प्राचीन शिव मंदिर है। सावन के मास में जो भी भक्त सच्चे मन से यहां भगवान शिव की आराधना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।अक्षय नरैया
हसनपुर लुहारी का प्राचीन शिव मंदिर