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Shamli News: संस्कारों संग निखरा शिक्षण कौशल, नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग रहा प्रेरणादायी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबद्ध सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का पांचवां दिन रहा। बृहस्पतिवार को प्रशिक्षण संस्कार, सृजनात्मकता और शिक्षण कौशल के समन्वय के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत पूनम अनेजा, सुधा बाना, प्रधानाचार्य पल्लवी ऐरन एवं मीनाक्षी शर्मा ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में शीला सिंह ने विद्यारंभ संस्कार एवं स्वर्णप्राशन संस्कार का व्यवाहारिक परिचय कराया। विद्यारंभ संस्कार में माताओं ने बच्चों को गोद में बैठाकर रोली से पहला अक्षर लिखवाया, जबकि स्वर्णप्राशन संस्कार में बच्चों को शहद चटाकर शिक्षा के प्रथम चरण से जोड़ने का भाव जागृत किया गया। इस दौरान भारतीय संस्कृति में संस्कारों के महत्व एवं उद्देश्य पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। इसके बाद पूनम अनेजा ने एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी) विषय पर मार्गदर्शन देते हुए खेल-आधारित गतिविधियों एवं रोचक शिक्षण विधियों के माध्यम से बच्चों को सहज रूप से शिक्षा से जोड़ने के उपाय बताए। प्रशिक्षुओं ने गतिविधियों को उपयोगी और प्रेरणादायी बताया।
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अगले सत्र में सुधा बाना ने शिशु वाटिका की समय-सारिणी के निर्माण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं ने सामूहिक रूप से शैक्षिक खेल, कविता, गीत एवं गतिविधियों की प्रस्तुति देकर शिक्षण को रोचक बनाने की विधियां प्रदर्शित कीं। इस अवसर पर प्रधानाचार्य संजय सैनी, स्वाति जैन, क्षेत्रीय वाटिका प्रमुख सुधा बाना, सोनी शर्मा, मीनाक्षी शर्मा एवं बिंदिया बिंदल रहे।
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