शामली। पोस्टमार्टम हाउस पर कमरे में रखीं सात लाशें। एक-एक करके बलवंत सिंह ने कई शव देखे, लेकिन अपनी पत्नी का शव नहीं पहचान पाए। पत्नी के साथ ही बेटी और उसके रिश्तेदारों की मौत की सूचना से मानो बलवंत का कलेजा ही बैठ गया था। काफी देर तक लाशों को देखते रहे, पुलिस पूछती रही कि इनमें से तुम्हारी पत्नी कौन सी है। काफी देर तक बलवंत सिंह उलझे से दिखाई दिए और फिर एक शव की तरह अंगुली उठाकर बोले कि यही है मेरी पत्नी सावित्री।
झिंझाना में मेरठ-करनाल हाइवे पर हुए हादसे में मेरठ के शोभापुर निवासी 70 वर्षीय बलवंत सिंह रावत पर मुसीबत का पहाड़ ही टूट पड़ा। हादसे में उनकी पत्नी सावित्री के अलावा उनकी बेटी नीतू, दामाद जयकिशन, बेटी का जेठ जयदेव, जेठानी निधि की मौत हो गई।
इसकी सूचना दिए जाने पर मंगलवार दोपहर करीब 12 बलवंत सिंह बनत (शामली) में पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंच गए थे। वहां मौजूद झिंझाना थाने के पुलिसकर्मियों ने बलवंत सिंह को पोस्टमार्टम हाउस के कमरे में रखे सभी शव दिखाए, तब तक चार लोगों के शवों की पहचान हो चुकी थी, जबकि तीन शवों की पहचान नहीं हो पा रही थी। उनमें से बलवंत सिंह की पत्नी सावित्री का शव भी था। पुलिस ने जब बलवंत सिंह से पूछा कि इनमें से आपकी पत्नी कौन सी है, तो वह बोले कि इनमें से कोई नहीं है। इसके बाद वह पोस्टमार्टम हाउस के बाहर आ गए और फिर दोबारा से कमरे में पहुंचे। एक महिला के शव के सिर के बाल देखने पर वह बोले कि यही है मेरी पत्नी सावित्री का शव। इसके बाद पहचान होने पर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कराई।
-- प्रेमवती ने किया था जाने से इंकार
शामली। हादसे में पल्लवपुरम निवासी प्रेमवती पत्नी रमेश, उसकी पुत्रवधू संगीता पत्नी राजेंद्र और पौत्र हनी पुत्र राजेंद्र की मौत होने पर उसके परिवार के लोग भी पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे। राजेंद्र के छोटे भाई राजू ने बताया कि उसकी मां प्रेमवती 23 फरवरी को ही मेरे साथ शिरडी में साईं वाले बाबा के दर्शन करने गई थीं। जब उसके भाई राजेंद्र ने माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए चलने के लिए कहा, तो उसकी मां ने इंकार किया था। वह कह रही थी कि तुम चले जाओ, लेकिन उसका भाई धार्मिक यात्रा पर मां को साथ ले जाने की जिद पर अड़ गया। इसके चलते उसकी मां भी अपने बेटे की बात को टाल नहीं पाई। उन्हें क्या मालूम था कि जिस यात्रा पर मां जा रही है, वह अंतिम यात्रा होगी।
राजेंद्र और जयकिशन में थी गहरी दोस्ती
शामली। पल्लवपुरम निवासी राजेंद्र और फाजलपुर निवासी जयकिशन के बीच गहरी दोस्ती थी। राजेंद्र नोएडा स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। दोनों दोस्तों ने धार्मिक यात्रा के लिए अपने अपने परिवार के साथ वैष्णो देवी जाने का प्लान कई महीने पहले बना लिया था। छह अप्रैल को एक तरफ राजेंद्र अपनी पत्नी, बेटे और मां तथा जयकिशन अपनी पत्नी, भाई, भाभी और सास को साथ लेकर माता वैष्णो देवी के दर्शन को स्कार्पियो से रवाना हुए थे।
तीन बजे शुरू हुआ पोस्टमार्टम
शामली। हादसे का शिकार हुए सात लोगों के शवों का पोस्टमार्टम शामली में हुआ। पोस्टमार्टम में देरी न हो जाए, इसके लिए पुलिस ने संजीदगी से कार्य किया। झिंझाना थानाध्यक्ष संदीप बालियान, चौसाना चौकी इंचार्ज सत्यपाल सिंह, उपनिरीक्षक अजय कसाना, आदेश कुमार, अनिल कुमार तोमर सहित करीब एक दर्जन पुजलिसकर्मी बनत स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंच गए थे। दरोगाओं को वहीं चाय की दुकान पर बैठाकर कागजी कार्रवाई पूरी कराई गई। जैसे जैसे शवों की पहचान होती रही, वैसे ही शवों का पोस्टमार्टम प्रारंभ करा दिया गया था। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने भी पोस्टमार्टम कराने के लिए दो चिकित्सकों की ड्यूटी लगा दी। अपराह्न करीब तीन बजे पोस्टमार्टम प्रारंभ कराए गए, जिसके बाद करीब साढ़े छह बजे पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने पर सभी सात शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए।
शामली में तीन बजे शुरू हुआ पोस्टमार्टम
शामली। हादसे का शिकार हुए सात लोगों के शवों का पोस्टमार्टम शामली में हुआ। पोस्टमार्टम में देरी न हो जाए, इसके लिए पुलिस ने संजीदगी से कार्य किया। झिंझाना थानाध्यक्ष संदीप बालियान, चौसाना चौकी इंचार्ज सत्यपाल सिंह, उपनिरीक्षक अजय कसाना, आदेश कुमार, अनिल कुमार तोमर सहित करीब एक दर्जन पुजलिसकर्मी बनत स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंच गए थे। दरोगाओं को वहीं चाय की दुकान पर बैठाकर कागजी कार्रवाई पूरी कराई गई। जैसे जैसे शवों की पहचान होती रही, वैसे ही शवों का पोस्टमार्टम प्रारंभ करा दिया गया था। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने भी पोस्टमार्टम कराने के लिए दो चिकित्सकों की ड्यूटी लगा दी। अपराह्न करीब तीन बजे पोस्टमार्टम प्रारंभ कराए गए, जिसके बाद करीब साढ़े छह बजे पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने पर सभी सात शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए गए।
झिंझाना भेजी गई डॉक्टरों की दो टीमें
शामली। मेरठ-करनाल मार्ग पर हुए हादसे की सूचना पर सीएमओ डॉक्टर राजकुमार ने घटनास्थल के लिए डाक्टरों की दो टीमें बनाई, जिन्होंने झिंझाना में पहुंचकर घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। हादसे में पांच लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि ट्रक ड्राइवर सहित आठ लोग घायल हो गए थे। सभी को झिंझाना सीएचसी पर लाया गया। वहां पर डॉक्टरों की कमी पड़ गई। सूचना पर सीएमओ डाक्टर राजकुुमार ने कैराना और शामली सीएचसी प्रभारी के नेतृत्व में दो टीमों का गठन किया और उनको झिंझाना में भेज दिया। इसके बाद घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया। सीएमओ डॉक्टर राजकुमार ने घटनास्थल पर एंबुलेंस भिजवाने के निर्देश दिए। इसके बाद मौके पर तीन-चार एंबुलेंस सहायता के लिए भेजी गई, जिनके माध्यम से शव पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचे।
अस्पताल में अफरातफरी का आलम
हादसे के बाद जब घायल सीएचसी झिंझाना में पहुंचने लगे, तो अस्पताल के डॉक्टरों में हड़कंप मच गया। सीएमओ ने सीएचसी प्रभारी को स्वयं फोन कर मौके पर जाने के निर्देश दिए। जब तक शामली से डाक्टरों की टीमें झिंझाना सीएचसी पर नहीं पहुंची, तब तक वहां के डाक्टरों के हाथ-पांव फूल रहे। शामली से डाक्टरों के पहुंचने के बाद ही उनको राहत मिली।
सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस की गाड़ियां भेज दी गई थी, साथ ही डाक्टरों की दो टीमें गठित कर झिंझाना सीएचसी पर भेज दी गई, ताकि समय पर और जल्दी उपचार मिल सके
-डाक्टर राजकुमार सीएमओ
एक आवाज पर मदद के लिए पहुंचा पूरा गांव
शामली। मेरठ के दो परिवार के सदस्यों के लिए मंगलवार का दिन अमंगलकारी साबित हुआ। पलक झपकते ही श्रद्धालुओं की मौत से कोहराम मच गया। हादसे के बाद मची चीखपुकार से माहौल काफी गमगीन हो गया। हादसे को देख ढाबा संचालक फूलकुमार ने शोर मचा दिया। इस पर देखते ही देखते सुबह करीब छह बजे ही मदद के लिए पूरा गांव जुट गया।
जम्मू से माता वैष्णो देवी के दर्शन करके वाया करनाल होते हुए मेरठ लौट रहे मंगलवार की सुबह करीब छह बजे श्रद्धालुओं से भरी स्कार्पियो झिंझाना क्षेत्र में मेरठ करनाल हाइवे पर ट्रक से जा टकराई। हादसे की मुख्य वजह ड्राइवर को नींद की झपकी लगना है। झपकी लगने के कारण स्कार्पियो अनियंत्रित होकर डिवाइडर पार कर ट्रक से जा टकराई। हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई। हादसे के वक्त चारो ओर सब कुछ सुनसान था। घटनास्थल के बाद चंद कदमों की दूरी पर ही फूलकुमार अपने ढाबे पर चाय बना रहा था।
हादसे को देखते ही उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। चाय छोड़कर वह घटनास्थल पर पहुंच गया। उसके साथ ही अन्य लोग भी पहुंच गए। फूलकुमार ने वहां से करीब सौ कदम की दूरी पर स्थित लक्ष्मणपुरा गांव में पहुंचकर लोगों को आवाज लगाई, तो चंद ही मिनटों में सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गए। कोई कार को उठाने का प्रयास करने लगा तो कोई घायल को बाहर निकालने का प्रयास करने लगा। पुलिस तथा अन्य अधिकारी और एंबुलेंस तो बाद में पहुंची, तब तक ग्रामीणों ने घायलों को बाहर निकालकर पुलिस की गाड़ी के माध्यम से अस्पताल में भेजवा दिया था।
एक घंटे विलंब से पहुंची एंबुलेंस
शामली। घटनास्थल पर 108 एंबुलेंस करीब एक घंटे विलंब से पहुंची। मंगलवार सुबह करीब 5.55 बजे हादसा हुआ। इस दौरान ग्रामीणों ने एंबुलेंस तथा पुलिस को कॉल कर दी, लेकिन एंबुलेंस से पहले ही पुलिस पहुंच गई। पुलिस की गाड़ी से ही घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक करीब सात बजे एंबुलेंस मौके पर पहुंची। इस पर लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा होते ही पुलिस ने ग्रामीणों को समझाकर शांत करा दिया।